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70 फीसदी पानी ‘जहरीला’

Hapur Updated Wed, 20 Jun 2012 12:00 PM IST
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कहते हैं कि जल ही जीवन है। लेकिन हापुड़, गढ़ और पिलखुवा में यह अमृत प्रदूषित होकर बीमार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लिए गए ज्यादातर मोहल्ले के पानी के सैंपल फेल हो गए हैं। शहर में जल जनित बीमारी का आलम किसी से छुपा नहीं है, ऐसे में जलकल के अधिकारी सैंपल रिपोर्ट दबाने में जुटे हैं।
पिलखुवा। नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा लिए गए दस मोहल्लों के पानी के सैंपल में से सात फेल हो गए हैं। टीम ने मोहल्लों में लगे 15 एचपी मिनी सबमर्सिबल पंपसेट (ट्यूबवैल) से घरों में जा रही पानी के नमूने लिए थे। अब जलकल अधिकारी रिपोर्ट दबाने में जुटे हैं।
मालूम हो कि बीते 25 अप्रैल को ‘अमर उजाला’ में बीमार पानी की खबर प्रकाशित होने के बाद पालिका अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दस मोहल्लों से पानी के सैंपल लिए थे। इनमें से मोहल्ला कृष्णगंज, सर्वोदयनगर, न्यू आर्यनगर, परतापुर चुंगी, गढ़ी, चाहडिब्बा और मोहल्ला मंडी से लिये गये नमूने फेल हो गये। केवल आर्यनगर, शिवाजी नगर और आवासीय टंकी के पानी के नमूने ही पास हुए हैं।

बिना क्लोरिनेशन के पानी सप्लाई क्यों?
नियमानुसार गर्मी के मौसम में बिना क्लोरिनेशन के पानी की सप्लाई नहीं की जानी चाहिये। इसके बाद भी पालिका बिना क्लोरिनेशन के पानी क्यों पिला रही है? इसका जवाब पालिका अधिकारियों के पास नहीं है।
प्रस्ताव पास पर नहीं लगे क्लोरीन पंपसेट
सभी सबमर्सिबल पंपसेट पर क्लोरीन सेट लगाने के लिए एक वर्ष पूर्व बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हुआ था। आज तक अधिकांश नलकूपों पर पंपसेट नहीं लगे।

ओवरहेड टैंकों का पानी क्लोरिनेशन में पास हुआ है। नलकूपों का पानी पीने योग्य था। अब टेस्टिंग में फेल हुआ है। शीघ्र ही सभी नलकूपों पर क्लोरिनेशन पम्पसेट लगा दिये जायेंगे।
- सतीश कुमार, जेई, जलकल


फुलडहरा ड्रेन के किनारे बसे गांवों का पानी साफ नहीं
गढ़मुक्तेश्वर। सिंभावली से पूठ तक नाले के किनारे बसे 15 गांवों के हैंडपंप से निकलने वाला पानी दूषित हो गया है। पानी का रंग पीला पड़ चुका है जबकि कुछ स्थानों पर तो पानी से दाल-सब्जी तक नहीं गल पा रही हैं। सात गांवों से लिए गए पानी के नमूनों में से दो फेल हो चुके हैं।
सिंभावली से जा रही फुलडहरा ड्रेन में एक औद्योगिक इकाई से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी डाला जाता है। नाले के किनारे बसे बक्सर, भोवापुर मस्तान नगर, रझैटी, पूठ, पलवाड़ा, पसवाड़ा, मोहम्मदपुर रुस्तमपुर सहित 15 गांवों का भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो चुका है। गांवों में पिछले तीन वर्ष में पीलिया, कैंसर आदि रोगों ने 200 से अधिक जिंदगियों को लील लिया है। इस मुद्दे को लेकर एक वर्ष पूर्व ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से अभियान चलाया तो तंत्र जागा। पानी के नमूनों की जांच कराई गई तो पूठ, पलवाड़ा आदि गांवों में कई हैंडपंपों के नमूने फेल पाए गए। पर नाला आज तक बंद नहीं हो पाया है।

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