माचिस नहीं मिली वरना सूबा दहलता

Hapur Updated Sat, 09 Jun 2012 12:00 PM IST
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बाबूगढ़ की आग : थाना जलता तो राजनीति की धुरी बन जाता पंचशीलनगर
डटे रहे हापुड़ इंस्पेक्टर की हवाई फायरिंग
आमने-सामने गोली चली तो बिछतीं लाशें
भीड़ के टूटते ही थाना छोड़ भाग गई पुलिस
हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर। बाबूगढ़ में जनाक्रोश का ज्वार यूं ही नहीं फूटा था। वो गम, गुस्से गुबार की आंधी थी जो सुरजन की मौत पर सामने आई थी। गुस्साई महिलाएं घर के मिट्टी के तेल की पिपियां भरकर लाई थीं। तेल हवालात में छिड़ककर थाने को आग में फूंकने का इरादा था मगर पुलिस की खुशकिस्मती रही जो माचिस उनके हाथ नहीं लगी। खुशनशीबी यह भी रही कि थाने के बाहर भीड़ से जूझ रहे इंस्पेक्टर हापुड़ ने हवाई फायरिंग करके सबको रोके रखा और आमने-सामने गोलियां चलने की नौबत नहीं आई। यदि थाने में आग लगती और आमने-सामने गोलियां चलतीं तो अपना हापुड़ ही जलता। पूरे सूबे की राजनीति की धुरी भी बनता।
चश्मदीदों के मुताबिक, भतीजे तेजपाल की हत्या मामले में गवाह चाचा सुरजन सिंह की मौत की खबर ने गांववालों को बहुत गुस्से में ला दिया था। उन्हें पुलिस की भूमिका पर शक हो रहा था, इसलिए हर कोई थाने की तरफ दौड़ रहा था। जिसे जो मिला, पुलिस से लड़ने को वहीं लेकर भाग रहा था। गुस्साई महिलाएं तो घरों से मिट्टी के तेल से भरीं केन ही उठा लाई थीं।
मौके पर मौजूद रहे लोगों ने बताया कि जब महिलाओं और पुरुषों की भीड़ बाबूगढ़ थाने पर टूटी तो वहां मौजूद थानेदार, दरोगा, सिपाही सब दीवार फांदकर पीछे की ओर भाग लिए। मुंशी रह गए तो उन्होंने दफ्तर के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए थे। महिलाओं ने न सिर्फ थाने में जमकर तोड़फोड़ की, बल्कि आग लगाने के लिए हवालात में तेल भी उड़ेल दिया। गनीमत रही जो वे माचिस भूल आईं। इधर-उधर माचिस मांगती भी रहीं मगर नहीं मिली। इससे वे चाहकर भी आग नहीं लगा सकीं।
भीड़ का तांडव जारी था और थाने को बचाने केलिए थाने के गेट पर अकेले हापुड़ इंस्पेक्टर राजेंद्र यादव जूझ रहे थे। उनके हाथ में रिवाल्वर था।
भीड़ अनहोनी करने पर आमाद था तो वे बार-बार हवा में गोली चलाकर मुसीबत टाल रहे थे। उन पर चारों ओर से पत्थर बरसते रहे मगर वे पीछे नहीं हटे। उनकी मदद को बाद में सीओ का गनर आगे आया और कार्बाइन से हवा में गोलियां दागकर उग्र भीड़ को पीछे खदेड़ा। दूसरी ओर से भीड़ से घिरे सीओ हापुड़ पवन यादव भी आ गए। फिर सबने चीखकर दूर खड़े तमाशा देख रहे बाबूगढ़ थाने के फोर्स को बुलाया। इसके बाद हालात काबू में होते चले गए। पब्लिक के तूफान में बाबूगढ़ थाना कुछ इस तरह से बचा।

कनिया कल्याणपुर में सन्नाटा, ताले लटके
हापुड़। बाबूगढ़ थाने में बवाल के बाद दूसरे दिन शुक्रवार को भी कनिया कल्याणपुर गांव में सन्नाटा पसरा रहा। कार्रवाई के भय से महिला-पुरुष गांव से पलायन कर गए हैं। अगर घरों में कोई है तो बच्चे। वह भी डरे-सहमे नजर आए। बृहस्पतिवार सुबह को स्कार्पियो की टक्कर से सुरजन की मौत हो गई थी। सुरजन सिंह 11 माह पहले हुई तेजपाल हत्याकांड का गवाह था। घटना के समय वह कचहरी में गवाही के लिए जा रहा था। ग्रामीण और मृतक के परिजनों ने सुरजन की हत्या का आरोप लगाते हुए एनएच 24 पर बाबूगढ़ थाने के बाहर जाम लगा दिया था। बाबूगढ़ थाने में जमकर तोड़फोड़, पथराव किया था। शुक्रवार को दूसरे दिन भी गांव में सन्नाटा छाया रहा। ग्रामीण इतने खौफजदा हैं कि शुक्रवार को गांव कनिया कल्याणपुर में स्थित दुकानें भी बंद रही।

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