अनियंत्रित होकर पलटी स्कूली बस, 20 बच्चे घायल

Ghaziabad Bureauगाजियाबाद ब्यूरो Updated Wed, 26 Sep 2018 11:42 PM IST
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अनियंत्रित होकर पलटी स्कूली बस, 20 बच्चे घायल
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- गांव जोगीपुरा की घटना, पांच बच्चों की हालत गंभीर
- गांवों से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी बस
- साइकिल सवार को बचाने के दौरान हुआ हादसा
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। कोतवाली क्षेत्र के गांव जोगीपुरा में स्कूली बच्चों से भरी एक मिनी बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे में बस सवार 20 बच्चे घायल हो गए। इनमें से पांच बच्चों की हालत गंभीर है। उन्हें हायर सेंटर मेरठ रेफर कर दिया गया है। दुर्घटना के बाद बस में बच्चों की चीख पुकार मच गई। राहगीरों ने जैसे तैसे बच्चों को बस से बाहर निकाला। पुलिस ने इस संबंध में जानकारी से इंकार किया है।
गांव असौड़ा स्थित एक पब्लिक की मिनी बस बुधवार को गांव जोगीपुरा और दादरी से बच्चों को लेकर स्कूल आ रही थी। बस में करीब 25 बच्चे थे। गांव जोगीपुरा के पास एक साइकिल सवार को बचाने के चक्कर में बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गई। इससे बस में सवार बच्चों में चीख-पुकार मच गई। मौके से गुजर रहे राहगीरों ने एकत्र होकर किसी तरह बच्चों को बस से बाहर निकाला। दुर्घटना में बस में सवार बीस बच्चे घायल हो गए। गांव जोगीपुरा निवासी निशा (11), तैयबा (12), पावी (8), कासिब (10) और अलशिया (14) को गंभीर चोटें आई हैं। बच्चों की गंभीर हालत देखकर उन्हें हायर सेंटर मेरठ के लिए रेफर कर दिया गया है। जबकि बाकी बच्चों को विभिन्न अस्पतालों में पहुंचाया गया। वहां से उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। मौके पर पहुंचे बच्चों के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया। स्कूल प्रबंध के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए और अभिभावकों को समझाकर शांत किया। एएसपी राम मोहन सिंह ने बताया कि मीडिया के माध्यम से ही बस पलटने की जानकारी मिली है। इस संबंध में कोई तहरीर आती है तो रिपोर्ट दर्ज की जाएगी।

स्कूल बसें नहीं उतर रही मानकों पर खरी
- पुलिस व परिवहन विभाग मूंदे है आंखें, विभाग को बड़े हादसे का इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
हापुड़। सुप्रीम कोर्ट और सरकार की लाख सख्ती के बावजूद शहर के विभिन्न स्कूलों की बसों की हालत खस्ता है। देहात क्षेत्र के स्कूलों में परिवहन व्यवस्था बेहद खराब है। बावजूद इसके परिवहन विभाग या पुलिस इस ओर से आंखें मूंदे हुए है। शायद विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
जिले में शहर के मुख्य स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो कितने ही स्कूल ऐसे हैं, जिनमें बच्चों की परिवहन व्यवस्था बहुत बुरी स्थिति में है। बच्चों को लाने -ले जाने में लगे वाहन जर्जर हालत मेें हैं। इनमें अधिकतर अवैध रूप से एलपीजी गैस से संचालित हैं। ऐसी स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके अलावा बसें निर्धारित मानकों को किसी भी तरह से पूरा नहीं करतीं। इन सबके बावजूद अधिकारी बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं हैं। इस संबंध में एआरटीओ प्रणव झा का कहना है कि मामले की जानकारी की जा रही है। दुर्घटना में शामिल बस और उसकी स्थिति की जांच की जा रही है। मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों को उल्लंघन पाया गया तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ये हैं स्कूल बसों के मानक
- बस में स्कूल का एक स्टॉफ होना चाहिए।
- स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर अंकित हो।
- बस 15 वर्ष से पुरानी न हो और उसकी फिटनेस सर्टिफिकेट हो।
- स्कूल और रूट से संबंधी पूरी जानकारी हो।
- बस में फर्स्ट एड बॉक्स हो।
- बस में फुट स्टेप की व्यवस्था हो।
- खिड़की से बच्चों के शरीर का कोई अंग बाहर न निकले।
- बसों में आपातकालीन निकास का रास्ता हो।
- बस पीले रंग से पुती हुई हो।
- बस के चालक व परिचालक के पास पहचान पत्र हो। दोनों प्रशिक्षित हों।
- बस की रफ्तार 40-60 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा न हो।
- बस का चालक वर्दी में हो।
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