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व्यापार छोड़ शुरू की बागवानी, ले रहे अच्छा लाभ, व्यापार के दौरान शहरों के भ्रमण से मिली बागवानी की प्रेरणा

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Mon, 20 Jan 2020 11:54 PM IST
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स मेरपुर में बाग दिखाता किसान लल्ला पाड़े।
स मेरपुर में बाग दिखाता किसान लल्ला पाड़े। - फोटो : HAMIRPUR
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भरुआसुमेरपुर। कस्बे का एक किसान दुधारू गाय व भैंसों का व्यापार छोड़कर बागवानी में उतर गया। इससे वह अच्छा लाभ कमा रहे हैं। व्यापार के दौरान दूसरे शहरों में पहुंचने पर वहां के बागों को देखकर उन्हें लगा कि क्यों न अपने खेतों में बाग लगाकर आमदनी की जाए। बस यहीं सोचकर उन्होंने करीब 10 वर्ष पूर्व व्यापार छोड़कर बागवानी शुरू कर दी। आंवला, अमरूद, नींबू, अनार के पौधे लगाए। किसान का मानना है कि परंपरागत खेती के बजाए बागवानी में ज्यादा लाभ है।
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कस्बे के चांदथोक निवासी बच्चा पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड की मिट्टी बहुत ताकतवर है। सिर्फ थोड़ी सी देखरेख कर अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। यहां की मिट्टी में तैयार पौधे पर अधिक मात्रा में फल लगते हैं। जिससे अच्छी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। कहा कि उनके पास 30 बीघा जमीन है। वह पहले परंपरागत खेती चना, मसूर, गेहूं, मटर, सरसों पैदा करते थे। साथ ही दुधारू गाय व भैंसों का व्यापार करते थे। व्यापार के सिलसिले में उन्हें मलिहाबाद, गोरखपुर, बस्ती आदि क्षेत्रों में जाना होता रहा।
वहां की बागवानी को देख जानकारी हासिल करना शुरू कर दिया। जब उन्हें एहसास हुआ कि यह बाग अपने बुंदेलखंड में भी लग सकते हैं तो व्यापार छोड़कर बागवानी की ओर आकर्षित हो गए और अपने जमीन के एक भाग में बगीचा लगाना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया दो बीघे में आंवला, दो बीघे में अमरूद व दो बीघे में नींबू व अनार के पौधे रोपित किए थे। जो आज फल दे रहे हैं।
बताया कि वह हर साल इस बाग से करीब दो लाख रुपये के फल बेच लेते हैं। किसान बच्चा पांडेय ने बताया कि पहले 6 बीघे में बमुश्किल 30 हजार का अनाज बेच पाते थे। उसमें कड़ी मेहनत, खाद, सिंचाई आदि का खर्च आता था। लेकिन जबसे इतने क्षेत्रफल में बागवानी की उससे करीब प्रतिवर्ष करीब दो लाख के फल बेच रहे हैं। बगीचे में अमरूद के 225 पौधे, आंवले का 100 पौधा लगा है। इसके साथ ही नींबू 25 व अनार 25 के पौधे भी फल देने लगे हैं।
अमरूद की मंडी में हमेशा रहती मांग
किसान ने बताया कि उनके बाग का अमरूद बेहद मीठा है और यह फल कानपुर से आने वाले फल से 100 रुपये प्रति क्रेट मंहगा बिकता है। इसकी मांग भी ज्यादा रहती है। बताया कि कस्बे की सब्जी मंडी में उनका फल पहुंचते ही सबसे पहले बोली लगती है।
रसदार फल की मार्केट वैल्यू अधिक
किसान ने बताया कि आंवला, नीबू व अनार के फल बहुत ही रसीले हैं। रसदार फल होने से उनकी मार्केट वैल्यू बहुत अच्छी है। आंवला का मुरब्बा व नींबू का अचार बहुत ही स्वादिष्ट बनता है।
बागवानी करने की दी नसीहत
किसान ने सलाह दी है कि लोगों को परंपरागत खेती को छोड़कर बागवानी की ओर आना चाहिए। क्योंकि इसमें दैवी आपदा का भी कोई खास दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके साथ ही अन्ना मवेशी भी नुकसान नहीं पहुंच पाते हैं। बताया कि एक बार लागत लगाकर पौधरोपित करनी होती है। उसके थोड़ी से देखरेख की जरूरत होती है और जीवन भर फल मिलने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
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