वर्चस्व के लिए 1960 से हो रही हैं हत्याएं

Hamirpur Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। बीहड़ी गांव सुरौलीबुजुर्ग ठाकुर बाहुल्य गांव में वर्चस्व की लड़ाई दशकों से चल रही है। 1960 के दशक में गांव के भाऊ सिंह गौतम के पास लाइसेंसी बंदूक थी। इसी बंदूक की जांच के लिए तत्कालीन दारोगा अग्निहोत्री जांच के लिए गांव पहुंचे और छापा मारा जो भाऊ सिंह को नागवार लगा और उसने दारोगा को बंधक बना लिया। तब ग्रामीणों की मदद से दारोगा को छुड़वाया गया। अगले दिन पुलिस ने गांव में जमकर तांडव किया और भाऊ सिंह समेत और दारोगा को छुड़वाने वालों को बांधकर गांव में घुमाया और जूता मारकर बेइज्जत की गई।
इसके बाद भाऊ सिंह बागी हो गया। उधर भाऊ सिंह का दूसरा पक्ष गयाप्रसाद गौतम व श्याम सिंह चंदेल भी वर्चस्व के लिए मैदान में आ गए। 1972 में भाऊ सिंह के भाई नतबरन सिंह व शिवकुमार ने गया प्रसाद की हत्या कर दी जबकि नतबरन सिंह को राजा भइया सिंह ने 1976 में मौत के घाट उतार दिया। चार जिलों के सीमा से जुड़े गांव सुरौली में चौकी स्थापित करने के लिए फतेहपुर, बांदा, कानपुर व हमीरपुर के पुलिस अधीक्षक ने निर्णय लिया और 1975 में पुलिस चौकी खोल दी गई। चौकी का विधिवत संचालन गांव के पंचायत भवन में 1979-80 में हुआ। इस चौकी के लिए एक इचंार्ज दारोगा, एक दीवान व 10 सिपाही का स्टाफ दिया गया। शुरूआती दौर में इस चौकी में पर्याप्त पुलिस बल रहा। इस चौकी को रिपोर्टिंग पुलिस चौकी का दर्जा मिला। 1979 में शिवकुमार को पुलिस एनकांटर में मार गिराया गया जबकि 1980 में भाऊ सिंह को गैंगवार में कानपुर जनपद के शभुई गांव के निकट मार डाला गया। उसके बाद से इलाका शांत हो गया। इस पुलिस चौकी से पचखुरा महान, सुरौली, बरूआ, भौंरा, छोटा कछार, बड़ा कछार, इसौली, झंझरियां डेरा, सुखवा डेरा, करही डेरा व चुनकी डेरा पर नजर रखी जाती है।
फोर्स के अभाव में मौके पर तुरंत नहीं जाती पुलिस
भरुआसुमेरपुर। वर्ष 2007 में चौकी इंचार्ज मोहर सिंह व सिपाही बृजेंद्र ने गांव में जुआरियों को पकड़ने के लिए एक घर में छापा मारा था। जिस पर जुआरियों ने दारोगा और सिपाही को मारपीट कर घायल कर दिया था। जिसमें पुलिस ने राजू प्रजापति, बल्लू, कल्लू व बलराम सिंह के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस घटना के बाद से पुलिस फोर्स कम होने से तत्काल मौके पर नहीं पहुंचते हैं। यहां हालात अभी भी पहले जैसे हैं। पुलिस चौकी में एक दारोगा, एक दीवान व 10 सिपाहियों की जगह सिर्फ दो सिपाही ही है। चौकी में चार रायफल, वायरलेस सेट सहित अन्य अभिलेख है। गांव निवासी पहलवान सिंह ने बताया कि गांव में छत्रपाल ने दहशत फैला रखी है।
स्थानीय थाना के अधीन पांच चौकी और 45 गांव की तीन लाख की आबादी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस फोर्स नहीं है। इस थाने में कसबा सहित पांच चौकी फैक्ट्री एरिया, इंगोहटा, सुरौली, पत्यौरा व कै थी गांवों में संचालित है। इस समय थानाध्यक्ष के अलावा थाने में दो दरोगा, 24 सिपाही है। जबकि जरूत है थानाध्यक्ष के अलावा 8 दारोगा चौकी और थाना मिलाकर 48 सिपाही व 7 दीवान। एक दारोगा के पास 60 हजार आबादी का कसबा है जबकि दूसरे के पास 4 चौकियों का चार्ज है।
लल्लू अंतिम सांस तक निभा गया दोस्ती
भरुआसुमेरपुर। सुरौली बुजुर्ग में ताबड़तोड़ फायरिंग के बीच अपने दोस्त छत्रपाल को बचाने के लिए लल्लू उर्फ अमोल यादव ने खुद पर गोलियां झेल लीं और मारा गया जबकि कक्कू और बालेंद्र मौके से भाग निकले। लल्लू के सिर और पीठ पर गोलियां लगीं। इसके बाद बेटे छत्रपाल को बचाने के लिए मां कमतुलिया आई, जिसे कई छर्रे लगने से गंभीर रूप से घायल हो गई। छत्रपाल को भी पीठ और कंधे पर छर्रे लगे। जिससे वह भी घायल हो गया।
घर में न होने से बहादुरा बाल-बाल बचा
भरुआसुमेरपुर। छत्रपाल की दबंगई के चलते मछली बनाने के लिए गांव के बहादुरा सविता को बुलाने गया लेकिन उसकी पत्नी ने उसके घर में नहीं होने की बात कही। इस पर छत्रपाल गालियां बकते हुए लौट आया। घर आते ही कुछ ही देर में गोलियां चलने लगीं। बहादुरा के परिजनों के मना कर देने पर वह बाल-बाल बच गया।










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