लगातार बारिश से तिल की फसल बर्बाद

Hamirpur Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। जिले में लगातार हो रही बारिश से खरीफ में बोई गई ज्यादातर फसलें बर्बाद हो रही है। इसमें सर्वाधिक नुकसान तिल की फसल को हुआ है। फिलहाल कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार तिल का एरिया 33765 हेक्टेयर बताया जा रहा है।
देर से मानसून आने पर खरीफ की फसलों की बुआई भी लेट हुई। इसके बावजूद किसान मौका पाते ही 97436 हेक्टेयर रकबे में खरीफ की फसलें बोईं। इसमें 19251 हेक्टेयर में ज्वार, 33765 हेक्टेयर में तिल, 17310 हेक्टेयर में उर्द, 8930 हेक्टेयर में मू्ंग बोई गई है। इसी तरह अरहर की बुआई 18090 हेक्टेयर, बाजरा 240 हेक्टेयर, मोटे अनाज 30 हेक्टेयर व मूंगफली 126 हेक्टेयर में बोई गई है। देर से बोई गई फसलों की इन दिनों हालत खराब है जबकि बुआई के बाद शुरुआती दौर में खेतों में समय समय पर हुई बारिश से फसलें लहलहा उठी। मौजूदा समय में इन फसलों में तिल और उर्द की फसलों में फूल और फली का वक्त चल रहा है। लेकिन कई दिनों से हो रही बारिश से इन फसलों के फूलों को खासा नुकसान हो रहा है। जिससे पैदावार पर असर पड़ने की संभावना है। फसलों को देख किसानों के चेहरे में मायूसी झलक रही है। फसलों के बर्बाद होने पर पौथिया गांव के किसान शिवकुमार निषाद, राजाकरन, शिवलाल, शुभकरण, राजबहादुर, सुरेश मिश्रा, भारत सिंह, अरविंद सिंह, आशीष पालीवाल का कहना है कि अतिवृष्टि से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिलाया जाए। साथ ही फसल बीमा योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
तिल की फसल से किसानी संभलने का सपना टूटा
टेढ़ा के प्रगतिशील किसान गोपीश्याम द्विवेदी का कहना है कि बारिश देर से हुई तो सोचा कि इस बार तिल की फसल से किसानी संभल जाएगी। उन्होंने 100 बीघे में तिल की फसल की बुआई कर दी लेकिन अतिवृष्टि से फसल बर्बाद हो चुकी है। बीज गोदाम से तिल का बीज खरीदकर बोया है। कहा कि इस फसल को उजाड़ना मजबूरी हो गई है।
बारिश ने बिगाड़ा फसल का खेल
बिरखेरा के किसान अशोक यादव भी तिल की फसल पर खासे उत्साहित रहे। कहते है कि इधर जब तिल की फसल में फूल और फली लगने का मौसम आया तो बरसात ने उनका खेल बिगाड़ दिया। तिल की फसल देखकर छाती फूल जाती थी। अगर सही सलामत फसल पककर घर आ जाती तो उनकी आर्थिक स्थित मजबूत होती लेकिन मानसून के लेट होने से इस फसल को नष्ट करने का काम किया है।
पानी के साथ उतनी ही धूप की भी जरूरत
वैज्ञानिक विधि से खेती करते आ रहे टेढ़ा निवासी किसान रामकिशोर सिंह का कहना है कि खरीफ की फसलों को पानी की जरूरत तो पड़ती है साथ ही ग्रोथ के लिए धूप भी जरूरी है। लेकिन देर से आए मानसून और आखिरी में जोरदार हो रही बरसात से खरीफ की फसलों को नुकसान हो रहा है। इसमें तिल के साथ उर्द और अरहर की भी फसल का नुकसान हुआ है।



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