सद्गगुरु को भगवान कहना आसान, मानना कठिन

Hamirpur Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। सद्गुरु को भगवान कहना तो आसान है किंतु सद्गुरु को भगवान मानना बहुत कठिन है। लोग अपनी वाणी से बहुत जल्दी सद्गगुरु को भगवान कहकर पुकारते हैं। किंतु जब मानने की अर्थात सेवा, सुमिरन व सत्संग की बारी आती है तो फिर प्रतिमाओं में भटक जाते है और सद्गुरु को साधारण इंसान समझने लगते हैं।
यह बात रमेड़ी स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में महात्मा क्रांति कुमार निरंकारी ने कही। उन्हाेंने कहा कि संसार में यदि लोग दुखी है तो उसके पीछे एक ही कारण हो सकता है कि उनके द्वारा किसी को मानसिक कष्ट दिया गया होगा या किसी संत महापुरुष को सताया या अपमानित किया होगा। बिना कारण के कोई कार्य नहीं होता। उन्होंने कहा कि दुख बीमारी का यही कारण है कि जहां से हमें कृपा मिलती है। वहां न जाकर इधर उधर भटक कर अपनी कीमती सांसे नष्ट करते है। उन्होंने बताया कि महात्माओं ने कहा है कि जो सुख चाहो सदा शरण राम की लेव। अर्थात हमेशा वाला सुख केवल सद्गुरु भगवान की शरण में ही मिलता है। भौतिक सुख तो अस्थायी होते है। ज्यादा भौतिकता अज्ञानता के कारण अंत में दुख का कारण बनती है। लोग भक्ति तो करना चाहते है। लेकिन अहंकार नही छोड़ते। इस मौके पर रीतू, राधा गुप्ता, रामऔतार, शिवकुमार, विदुर सचान, सालू सचान, गोविंद राम द्विवेदी, देशराज रचनाकार मौजूद रहे। संचालन जगदीश शंकर निरंकारी ने किया।

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