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आतंक के गुरू को जल्द फांसी मिलती तो अच्छा होता

Hamirpur Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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हमीरपुर/राठ। । संसद पर हमला करने वाले मास्टर माइंड अफजल गुरू को फांसी पर लटकाए जाने पर भाजपाइयों ने मिठाई बांटकर खुशी जताई। भाजपाइयों ने कहा कि केंद्र सरकार भाजपा के दबाव के चलते उसे फांसी दी गई है।
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नगर पालिका पार्क में भाजपा नगर अध्यक्ष लक्ष्मीरतन साहू व नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिध कुलदीप निषाद के नेतृत्व में सैकड़ों भाजपाई जुटे। इस मौके पर प्रदेश कार्य समिति के पूर्व सदस्य प्रीतम सिंह ने कहा कि यह उनकी पार्टी का दबाव पड़ने से ही केंद्र सरकार को अफजल गुरू को फांसी देनी पड़ी। पूर्व जिला उपाध्यक्ष बाबूराम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि केंद्र सरकार को उनकी पार्टी के प्रदर्शनों के आगे झुकना पड़ा। बाबूराम निषाद अफजल गुरू की फांसी को पार्टी की जीत बताया। चंद्रप्रकाश गोस्वामी, रुद्र प्रताप सिंह ने कहा कि कांग्रेस मुस्लिम वोट बैंक के डर से अफजल गुरू को फांसी नहीं दे रही थी। इस मौके पर रामपाल कुटार, राजबहादुर निषाद, रोहित गुप्ता, अमर प्रकाश दीक्षित, रजनीकांत अग्रवाल, रवींद्र शुक्ला, कपिल देव पांडेय, चंद्रभान कुशवाहा मौजूद रहे।

संसद भवन पर हुए आतंकवादियों के हमले के मुख्य आरोपी अफजल को फांसी दिए जाने पर लोगों ने खुशी जाहिर की। भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में भाजपा नेता ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया। सरकार का यह कदम पहले उठ गया होता तो शहीद परिवारों को अधिक खुशी होती। वहीं भाजपा के नगर अध्यक्ष कृष्ण कुमार गुप्ता ने कहा कि सरकार को देश के हित के किसी भी निर्णय में हिचकना नहीं चाहिए। व्यापार मंडल के प्रदेश मंत्री केजी अग्रवाल, बार संघ के सहमंत्री सुनील कुमार शर्मा, समाजसेवी राकेश मिश्रा आदि ने अपनी प्रतिक्रिया में केंद्र सरकार के निर्णय की प्रशंसा की।
संसद पर हमला करने के मास्टरमाइंड अफजल गुरू को शनिवार सुबह 8 बजे फांसी पर लटका दिया गया। अफजल गुरू के फांसी पर लटकाने की मांग विपक्षी दलों सहित अन्य संगठनाें की तरफ से बराबर की जा रही थी। वहीं केंद्र सरकार ने अफजल गुरू की फांसी को लेकर राष्ट्रपति से मंजूरी मिलते ही कार्रवाई पर अमल किया।
देश की संसद पर 13 दिसंबर 2001 को पांच आतंकियों ने हमला बोला था। इस घटना में जहां आतंकियों की गोलाबारी में नौ लोग शहीद हुए थे और 15 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में अफजल गुरू को संसद में हमला करने के मास्टरमाइंड के रूप में 15 दिसंबर 2001 को गिरफ्तार किया था। यह आतंकी जैश ए मोहम्मद का सक्रिय सदस्य था। अफजल गुरू को दिल्ली हाईकोर्ट ने 26 सितंबर 2006 को फांसी की सजा सुनाई। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी 12 जनवरी 2007 को बरकरार रखा। फांसी की सजा होने के बाद अफजल गुरू की पत्नी तबस्सुम गुरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से दया याचिका लगाई लेकिन कोई फैसला न होने पर उसे तिहाड़ जेल में निरुद्ध रखा गया। अफजल को फांसी पर लटकाने की खबर गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पुष्टि की गई तो विपक्षी दलों सहित मांग कर रहे संगठनों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं आने लगी। उन संगठनों के प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पर एक नजर।
आतंकियों को पालने के बजाय तुरंत फांसी दें
युग चेतना महाविद्यालय के प्रबंधक स्वामी नित्यानंद महाराज ने कहा कि कानून की इस कार्रवाई से आतंकियों को सबक लेना चाहिए। केंद्र सरकार महंगाई, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाकर विवशता में उठाया गया कदम है। ऐसे आतंकियों को पालने के बजाए शीघ्र फांसी देनी चाहिए।
भाजपा बोली मेरे दबाव में दी गई फांसी
भाजपा नेता बाबूराम निषाद का कहना है कि केंद्र सरकार देर आई दुरुस्त आई। अफजल को फांसी की मांग उनकी पार्टी लंबे अर्से से कर रही थी। वह अफजल की फांसी पर केंद्र सरकार से ज्यादा अपनी पार्टी को श्रेय देंगे। जिसके विरोध व प्रदर्शनों के चलते केंद्र सरकार को झुकना पड़ा।
आतंकवादियों की एकमात्र सजा फांसी
समाजसेवी मुन्नीलाल अवस्थी का कहना है कि मानवता के विरोधी आतंकवादियों के लिए एकमात्र यही सजा है। आतंकवाद व कट्टरवाद के नाम पर निर्दोषों का खून बहाने वाले आतंकवादियों को यहां तो फांसी की सजा पर्याप्त है। साथ ही यह कहना है कि अगर ईश्वर उनकी बात सुन रहा हो तो ऐसे आतंकवादी को स्वर्ग तो क्या नरक में भी जगह नही देनी चाहिए।
जल्द फांसी देते तो काफी खर्च बचता
सपा के जिला सचिव शिवप्रसाद कुशवाहा का कहना है कि जो भी व्यक्ति गलत करें उसे सजा मिलनी ही चाहिए। अफजल तो संसद पर हमला करने का मास्टर माइंड था, इसलिए उसे तो फांसी मिलनी ही चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार ने देरी की है। उसे और जल्दी फांसी में लटकाकर उस पर खर्च हो रहे धन को बचाया जा सकता था।
देर आए पर दुरुस्त आए
कांग्रेसी नेता संजयवीर राजपूत का कहना है कि केंद्र सरकार ने उचित समय पर उचित फैसला लेकर संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरू को फांसी दी है। उनकी पार्टी समय रहते उचित फैसले करती है। कहा कि अफजल गुरू आतंकवादी था। इसीलिए केंद्र सरकार के गृहमंत्री ने उसकी फांसी की सजा के लिए राष्ट्रपति से सिफरिश की थी। जिस पर उन्होंने अपनी मोहर लगा दी।

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