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हर माह आ रहा है श्रम प्रवर्तन विभाग में बजट

Hamirpur Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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श्रमिकों के पंजीयन में कंजूसी से नहीं मिल रहा लाभ
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राजेश सिंह
हमीरपुर। श्रम प्रवर्तन विभाग से संचालित कल्याणकारी योजनाओं का बुरा हाल है। बीते 2010 से संचालित योजनाओं में श्रमिकों के हितार्थ चलने वाली योजना में अभी तक सिर्फ 412 श्रमिक ही पंजीकृत हो सकेंगे। हालत ये है कि सिर्फ 12 महिलाएं ही शिशु हितलाभ योजना में लाभान्वित हो सकी हैं। हजारों की संख्या में मजदूरी करने वाले श्रमिकों को लाभान्वित नहीं कर पाने से विभाग में 2 करोड़ से अधिक का बजट डंप है।
वर्ष 2010 से श्रमिकों को लाभान्वित करने की 10 योजनाएं श्रम प्रवर्तन विभाग से संचालित है। दुर्घटना सहायता योजना में मजदूर की दुर्घटना में मृत्यु होने पर 1 लाख अपंगता/विकलांग होने पर 75 हजार रुपए उपलब्ध कराया जाता है। मातृत्व लाभ में पंजीकृत महिला को प्रसव के लिए 3 हजार रुपए एकमुश्त दिए जाते है। इसी तरह शिशु हित लाभ में श्रमिकों को पुत्री पैदा होने पर चार हजार व पुत्र के पैदा होने पर तीन हजार रुपए मिलता है। मेधावी छात्र पुरस्कार में पंजीकृत श्रमिक के बच्चों को एक निश्चित अंक मिलने पर पुरस्कार देय है। मृत्यु एवं अंत्येष्टि में श्रमिकों को 30 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है। श्रम प्रवर्तन विभाग श्रमिकों को एंबुलेंस सहायता, कौशल विकास तकनीकी सहायता, गंभीर बीमारी, निर्माण कामगार पुत्री विवाह अनुदान, बालिका आर्शीवाद योजनाएं संचालित कर रहा है। बीते तीन वर्षो से संचालित विभाग की लाभकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ 12 महिलाएं ही पा सकी है। जबकि जिले भर में निर्माण कार्य कराने वाली कार्यदाई संस्थाएं बजट का एक फीसदी धनराशि विभाग को भेज रही है। ऐसे में देखा जाए तो चालू वित्तीय वर्ष के नवंबर माह तक 36 लाख 52 हजार 678 रुपए जमा हो चुके है। इसी तरह बीते तीन वर्षो में 2 करोड़ से अधिक की धनराशि श्रम प्रर्वतन विभाग में जमा है। जिसका लाभ श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी श्रवण कुमार शुक्ला का कहना है कि जिले की विभिन्न कार्यदाई संस्थाओं से कहा गया है कि श्रमिकों का पंजीयन कराएं। बताया कि कार्यदाई संस्थाएं इस कार्य में रुचि नहीं ले रही है। ऐसे में अभी तक विभाग में 412 श्रमिक ही पंजीयन करा सके है। बताया कि जिले में 175 महिला श्रमिक भी पंजीकृत है।


सिर्फ 12 महिलाएं ही पा सकी शिशु हित लाभ
विभाग में पंजीयन कराने वाले मसगांव निवासी राकेश कुमार की पत्नी गायत्री देवी को पुत्री होने पर बीते मार्च माह में 4 हजार रुपए शिशु हित लाभ मिला। इसी गांव की मंजूषा पत्नी संजीव कुमार को भी चार हजार, स्वासा निवासी शोभा को चार हजार, संगीता को तीन हजार, आशा को तीन हजार, पारा के रामऔतार को तीन हजार, चंद्रभूषण को जुड़वा पुत्र व पुत्री होने पर सात हजार सहित 12 लोगों को ही शिशु हित लाभ योजना का लाभ मिला है। इसके अलावा चल रहीं अन्य योजनाओं का लाभ विभाग नहीं दे सका है।

वर्ष में 90 दिन काम करने वालों का किया जा रहा पंजीयन
भवन सहित अन्य निर्माण कार्यो में कार्यरत महिला एवं पुरुष श्रमिक जिनकी आयु 18 वर्ष से अधिक एवं 60 वर्ष से कम है। वह निर्माण कार्य वर्ष में कम से कम 90 दिन कार्य कर चुका हो श्रम प्रवर्तन विभाग में पंजीयन का पात्र है। पंजीयन फार्म निशुल्क विभाग से प्राप्त कर सकते है। ऐसे श्रमिक जो सार्वजनिक निर्माण विभाग, सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, जलनिगम, जलसंस्थान, नगर निकाय, विकास प्राधिकरण, आवास विकास परिषद द्वारा संपन्न कराए जा रहे कार्यो में सीधे अथवा ठेकेदार के माध्यम से कार्यरत है वह पंजीयकरण के लिए सीधे संपर्क कर सकते है। कर्मकार पंजीकरण फार्म भरकर दो पासपोर्ट साइज की फोटो, आयु संबंधी प्रमाण पत्र पंजीयन अधिकारी को दें। इसमें 100 रुपए पंजीयन के समय देना होगा। साथ ही श्रमिक को हर वर्ष 50 रुपए अंशदान के रुप में जमा करना होगा। पंजीकरण कराने के बाद प्राप्ति रसीद के साथ परिचय पत्र भी तुरंत लें लें।

चालू वित्तीय वर्ष में कार्यदाई संस्थाओं ने जमा अंशदान (एक नजर में)
माह धनराशि (लाख में) माह धनराशि
मार्च 738236 अप्रैल 59852
मई 414125 जून 672448
जुलाई 141264 सितंबर 1881626
अक्तूबर 38020 नवंबर 377679

नहीं मिला 90 दिन काम
ग्राम पंचायत मेरापुर के डिग्गी निवासी हरीप्रसाद निषाद पेशे से मजदूर है। मनरेगा में काम करने के लिए जॉबकार्ड है। 100 दिन काम मिलने की योजना के तहत उसे वर्ष में 90 दिन भी काम नहीं मिल सका है। उसका कहना है कि काम न मिलने से वह परिवार का भरण पोषण करने के लिए मजबूरी में रिक्शा चला कर गुजारा कर रहा है। श्रम प्रवर्तन विभाग की योजनाओं की जानकारी उसे नहीं है।

किसी ने नहीं दी जानकारी
मुख्यालय के निकट डिग्गी निवासी होरीलाल ने श्रम प्रवर्तन विभाग में संचालित योजनाओं पर कहा कि उसे किसी ने जानकारी नहीं दी है। मनरेगा कार्ड धारक इस मजदूर ने कहा कि काम न मिलने पर वह जहां भी काम मिला करता है। सालभर में सिर्फ बरसात में ही काम पर नहीं जाता बल्कि जहां कहीं भी सरकारी भवन का निर्माण कार्य हुआ करने जाता है। कहा कि किसी भी विभाग के ठेकेदार ने उसका पंजीयन कराने क ी बात नहीं कही है।

काम की तलाश में जाना पड़ता परदेश
विकासखंड कुरारा के डामर गांव निवासी मनरेगा जॉबकार्ड धारक पानलाल का कहना है कि श्रम प्रवर्तन विभाग सहित किसी भी कार्यदाई संस्था ने पंजीकरण कराने की जानकारी नहीं दी है। मजदूर ने कहा कि गांवों में 90 दिन काम नहीं मिल पाता है। ऐसे में आम लोगों के यहां जो भी काम मिला करता रहता है। साथ ही काम की तलाश में उसके बेटे परदेश में है। कहता है कि जानकारी कर पंजीयन कराने का प्रयास करेगा।

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