न खेती रही, न रोजी

Hamirpur Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
न खेती रही, न रोजी
dlमुनीर खान
भरूआसुमेरपुर (हमीरपुर)। हर हाथ को काम देने की सरकारी योजनाएं किस गति का शिकार होती हैं यह कसबे की औद्योगिक क्षेत्र की स्थिति को देखकर सहज समझा जा सकता है। वर्ष 1984 में उद्योगो को यहां स्थापित करने क ी इच्छा ने किसानों की 300 हेक्टेयर उपजाऊ जमीन भी निगल ली है। पर न तो खेती रही और न ही बेरोजगारों को काम। जब तक करों में सरकारी रियायत रही, फै क्ट्रियां लगती रहीं। छूट खत्म होते ही इस नगरी के बुरे दिनों की शुरूआत हो गई।
कसबे की दक्षिण दिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 86 के दोनों ओर किसानों की उपजाऊ भूमि थी। लेकिन अब खंडहर हैं। वर्ष 1983 में तत्कालीन प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने जिले को औद्योगिक क्षेत्र में शामिल करते हुए 300 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहीत की थी, कुल 297 प्लाट बनाए गए। इस फैक्ट्री एरिया को खूबसूरत बनाने के लिए छह पार्क, स्कूल, अस्पताल, आवासीय कालोनियां व यूपीएसआईडीसी का कार्यालय बनाया गया। प्लाटों को बांटकर 20 मार्ग बने। शुरूआत में जब सरकार टैक्स, बिजली, पानी में छूट दे रही थी और ऋण देने में सहूलियतें तो लगभग पांच दर्जन फैक्ट्रियां लगीं। कुछ तो शुरू होते ही बंद हो गई, तो कुछ छूट के समय तक खूब दम से चलीं। लेकिन छूट समाप्त होते ही फैक्ट्रियों के मालिकानों का रवैया बदल गया। बिजली, पानी के बिल व वित्तीय संस्थाओं का ऋण भुगतान करना बंदकर दिया गया। इस बकाएदारी पर तत्कालीन अधिकारियों ने फैक्ट्री मालिकों का खूब सहयोग किया। मौजूदा समय में सिर्फ एक दर्जन फैक्ट्रियां बची हैं।
इधर मालिकान यहां की मशीनें उखाड़-उखाड़कर अन्य प्रांतों में फैक्ट्री स्थापित करते रहे और विभागीय अधिकारी फैक्ट्री मालिकानों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर औपचारिकता निभा देते है। उधर, 300 हेक्टेयर खेतिहर जमीन जाने से किसान दुखी है। क्योंकि उनसे वादा किया गया था कि मुआवजा मिलेगा और परिवार के एक व्यक्ति क ो स्थाई नौकरी। लेकिन किसानों के सारे अरमानों पर पानी फिर चुका है। इनकी व्यथा यह है कि न तो जमीन रही और न ही नौकरी मिली। इस प्रकार वह दोनों दीन से गए।
डूब गया 25.75 करोड़ रूपए
भरूआसुमेरपुर। पावर कारपोरेशन के लाख प्रयासों के बावजूद फैक्ट्रियों पर बकाया 25.75 करोड़ रुपए नहीं वसूले जा सके। वर्ष 2009 में तत्कालीन अधिशाषी अभियंता ओपी यादव ने पांच बड़ी बकाएदार फैक्ट्री मालिकानों के पता बताने एवं वसूली में सहयोग देने वालों को इनाम देने की घोषणा की थी। लेकिन इन फैक्ट्रियों की जानकारी नहीं हो सकी है। इनमें ऐश्वर्या इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, वैभव कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, यूपी एलायज प्राइवेट लिमिटेड, वीनस लोहा उद्योग, जैमिनी इलेक्ट्रो केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड है। इन्हीं से कारपोरेशन को करीब 25.75 करोड़ का राजस्व वसूली करनी है। मौजूदा समय में हिंदुस्तान यूनीलीवर, रिमझिम इस्पात, ध्रुव सीमेंट, हंस मेंटल, सुदर्शन आक्सीजन, अमित पैकेजिंग सहित एक दर्जन फैक्ट्रियां संचालित है।
31 तक मांगे आवेदन
महाप्रबंधक उद्योग केंद्र एएम खान ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के 42 प्लाट खाली है। 31 दिसंबर तक प्लाट लेने वालों से आवेदन यूपीएसआईडी ने मांगे है। कहा कि 500 रुपए स्कवायर मीटर पर दी जा रही है। यूपीएसआईडीसी ही प्लाटों के आवंटन के बारे में पूरी जानकारी की जा सकती है।

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