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65 रुपए की बढ़ोत्तरी बताई नाकाफी

Hamirpur

Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
हमीरपुर। केंद्र सरकार द्वारा गेहूं का समर्थन मूल्य सिर्फ 65 रूपए बढ़ाए जाने की घोषणा किए जाने से किसानों में आक्रोश है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज, बिजली, पानी व मजदूरी की लागत को देखते हुए बढ़ाए गए दाम नाकाफी है। सरकार ने पिछले वर्ष के देखते हुए खाद के दाम तो दुगने कर दिए।
लेकिन किसानों के गेहूं के दामों में नाम मात्र की बढ़ोत्तरी कर उनके साथ धोखा किया गया है। कहा कि अगर सरकार ने गेहूं के दामों में और अधिक बढ़ोत्तरी नही करती है तो किसान इस फसल को करना ही बंद कर देंगे। केंद्र सरकार ने चालू रबी सीजन के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 65 रूपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर 1350 रूपए किए जाने की घोषणा की है। सरकार की इस घोषणा से गेहूं की फसल करने वाले किसानों में आक्रोश व्याप्त है। किसानों का कहना है कि सरकारें कर्मचारियों व अपने वेतन भत्तों को मनमाना बढ़ा रही है। लेकिन किसानों के साथ सौतेला व्यवहार कर उनकी कमर तोड़ने में लगी हुई है। गेहूं के समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी को लेकर किसानों ने अलग अलग प्रतिक्रियाएं दी है।
गेहूं बोना घाटे का सौदा
जिला सहकारी बैंक के पूर्व उपाध्यक्ष एवं प्रगतिशील किसान सुधेश द्विवेदी का कहना है कि जिस अनुपात से खाद के दाम बढ़ाए गए हैं। उसके हिसाब से गेहूं के एमएसपी में सिर्फ 65 रुपए की बढ़ोत्तरी नाकाफी है। खाद, बीज के साथ मजदूरी मंहगी होने से किसानों गेहूं की फसल घाटे का सौदा नजर आ रहा है।
नही बोएंगे गेहूं
मवइया निवासी किसान विज्ञान प्रकाश त्रिपाठी का कहना है कि केंद्र सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोत्तरी कर उनके साथ छलावा किया है। किसानों को गेहूं की बुआई क्षेत्र पर एक बार फिर विचार करना पड़ेगा। क्योंकि लागत के हिसाब से गेहूं का सही मूल्य नही मिल पा रहा है। कहा कि कम से कम गेहूं का समर्थन मूल्य 1500 रूपए प्रति क्विंटल होना चाहिए।
भुगतना होगा खामियाजा
पढ़ोरी गांव निवासी किसान शिवपूजन ने कहा कि केंद्र सरकार को गेहूं के समर्थन मूल्य में मामूली बढ़ोत्तरी किए जाने का खामियाजा आगामी लोस चुनाव में देखने को मिलेगा। किसानों की हितैषी बताने वाली कांग्रेस सरकार ने किसानों को छलने का काम किया है। खाद, बीज के हिसाब से गेहूं का समर्थन मूल्य बहुत कम है।
वेतन भत्ते बढ़ाने में नही करते संकोच
रीवन गांव निवासी किसान गोविंद बोलेै कि सांसद, विधायक अपने वेतनमान व भत्ते बढ़ाने में संकोच नही करते हैं। कर्मचारी धरना प्रदर्शन व हड़ताल कर अपने वेतनों व भत्तों में बढ़ोत्तरी करा लेते है। लेकिन देश का किसान न तो धरना दे सकता है, न तो प्रदर्शन कर सकता है और उसके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
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