जिन्स में उछाल से मंडी हुई गुलजार

Hamirpur Updated Tue, 25 Dec 2012 05:30 AM IST
जिन्स में उछाल से मंडी हुई गुलजार
मौदहा (हमीरपुर)। कृषि जिन्सों के भावों में बढ़ोत्तरी होने से मंडी समिति में तिल और ज्वार पैदा करने वाले किसानों की बल्ले बल्ले है। पिछले वर्ष के दिसंबर की तुलना में चालू माह में अभी तक मंडी की आय दोगुना हुई है। शीतलहर के बावजूद सोमवार को मंडी में बड़ी संख्या में किसान जिन्स लेकर आए।
कृषि उत्पादन मंडी समिति में बीते वर्ष के दिसंबर माह में मात्र 80 क्विंटल ज्वार आई थी। जबकि ज्वार का भाव 1600 रुपए प्रति क्विंटल था। गेहूं की आवक 6600 क्विंटल रही जबकि भाव 900 रुपए प्रति कुंतल था। वहीं 1200 क्विंटल तिल की आवक रही थी। हालांकि इसका भाव 5200 रुपए था। इसके चलते बीते वर्ष के दिसंबर में 8 लाख 32 हजार था। जबकि मौजूदा समय में मंडी की आमदनी 23 दिसंबर तक 16 लाख पहुंच चुकी है। सबसे अधिक आवक गेहूं 6830 क्विंटल आया है। इसका भाव भी 1360 रुपए प्रति क्विंटल है जबकि तिल पैदा करने वाले किसानों की बल्ले-बल्ले है। बीते 23 दिन में 1308 क्विंटल तिल मंडी में बेची गई है। रेट भी 9 हजार रुपए प्रति क्विंटल मिलने से किसानों में भारी प्रसन्नता है। ज्वार पैदा करने वाले किसान भी अच्छा भाव पा रहे है। ज्वार की खेती का रकबा कम होने के बावजूद 1200 क्विंटल आवक हुई है। इसकी दर 1600 से 2000 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे है। मसूर, चना जिन्स बीते माह की दिसंबर की ही स्थिति में है। हालांकि लाही के भाव चार हजार रुपए प्रति क्विंटल के आसपास झूल रहे है। किसानों को मिल रहे अच्छे भावों से मंडी में जिन्सों की आवक भी लगातार बढ़ती जा रही है। मंडी के वरिष्ठ सहायक सतीशचंद्र यादव का कहना है कि जिन्सो की आवक बढ़ने से मंडी शुल्क में खासा इजाफा हुआ है।

तिल के भाव ने स्थिति सुधारी
चांदी गांव के प्रगतिशील किसान ग्राम प्रधान मुखिया भदौरिया ने बताया कि तिल की पैदावार क्षेत्र में अच्छी हुई है। साथ ही भाव भी ठीकठाक मिल रहेे है। कहा कि इस बार उन्होंने 32 क्विंटल तिल मंडी में बेची है। कहा कि अभी और भाव बढ़ने के इंतजार में 50 क्विंटल तिल रोके है।

वनरोजों ने दिक्कत
भुलसी गांव निवासी किसान अशोक कुमार सिंह ने कहा कि ज्वार की खेती में अच्छा लाभ मिला है। उसने ज्वार बोई। लेकिन बनरोजों के झुंड ने ज्वार की फसल बर्बाद कर दी। हालांकि अरहर व तिल ने उसे लाभ दिलाया है। उसका पूरा क्षेत्र ज्वार की खेती के लिए उपयोगी है। लेकिन बनरोजों की एक बड़ी संख्या किसानों को तबाह कर रहे है।
ज्वार के भुट्ठे अन्ना जानवरों ने नष्ट कर दिए
मवईया गांव केनिवासी राजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि उसके गांव सहित अन्य गांवों में ज्वार की फसल हमेशा अच्छी होती रही है। लेकिन अधिकतर ज्वार के भुट्ठे अन्ना जानवरों ने नष्ट कर दिए। इसके बावजूद ज्वार की फसल पैदा की है। उन्होंने कहा कि अच्छे भाव से प्रभावित है।

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