40 वर्ष बाद भी नहीं हो सकी है चकबंदी

Hamirpur Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
भरूआ सुमेरपुर (हमीरपुर)। मौजा सुमेरपुर की चकबंदी बीते 40 साल से नहीं हो पा रही है। जिसके चलते ग्राम समाज की 223 एकड़ व सरकारी भूमि 411 एकड़ का पता नही चल पा रहा है। इस जमीन पर कब्जा किए लोग चकबंदी को किसी न किसी रूप से प्रभावित कराए हैं। जबकि चकबंदी प्रक्रिया से संबंधित कोई न्यायालीय अवरोध नहीं है। यह खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना से हुआ है।
मौजा सुमेरपुर का जेड ए के अंतर्गत 8684 एकड़ भूमि है। इस भूमि के चकबंदी के लिए 1972 में पहली बार धारा 4 का प्रकाशन किया गया। इसके बाद चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई। लेकिन कुछ दिनों बाद प्रक्रिया ठप पड़ गई। इसके बाद 1980 को दोबारा धारा 4 का प्रकाशन किया गया, लेकिन फिर भी चकबंदी प्रक्रिया पूरी नही हो सकी। इसके बाद 23 जनवरी 2003 को धारा 4 का तृतीय प्रकाशन हुआ। प्रकाशन के बाद कुछ दिनों तक सर्वे व नापजोख का काम हुआ लेकिन फिर ठप हो गया। चकबंदी प्रक्रिया ठप होने पर कसबा निवासी अरूण प्रकाश तिवारी उर्फ भोला ने जन सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत विभाग से सूचनाएं मांगी। सुमेरपुर में कुल रकबा 8684 एकड़ है। इस मौजे में ग्राम समाज की 223.88 एकड़ एवं सरकारी भूमि 411.09 एकड़ है। वर्तमान समय में सर्वे कार्य किया जाना है। जन सूचना अधिकारी मेघवरण ने बताया कि इस मौजे की चकबंदी प्रक्रिया से संबंधित कोई न्यायालीय अवरोध नही है। सरकारी भूमि व ग्राम समाज की जमीन को कब्जाए लोग चकबंदी प्रक्रिया में किसी न किसी तरह से अवरोध उत्पन्न कर ठप करा देते है। ताकि कब्जा बरकरार रहे।

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