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मौहर अस्पताल में तीन दिन देखते हैं डाक्टर

Hamirpur Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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हमीरपुर। सुमेरपुर विकासखंड क्षेत्र के मौहर गांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में मात्र तीन दिन ही रोगियों को डाक्टर देखते हैं। बाकी दिन स्वीपर और चौकीदार के हवाले रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात समय में डाक्टर के नहीं मिलने पर ग्रामीणों को झोलाछाप की शरण में जाना पड़ता है। तीन गांवों में एक ही एएनएम है। डा. उमापति त्रिपाठी ने बताया कि उनकी ड्यूटी स्मार्ट कार्ड बनवाने में लगा दी गई है। वह लगातार 18 अक्तूबर तक स्मार्ट कार्ड बनवाने में व्यस्त हैं।
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मौहर गांव में मौजूदा समय में कोई भी चिकित्सक नहीं है। अस्पताल स्वीपर कम चौकीदार रामशरण के हवाले है। रामशरण सुबह ताला खोलकर अस्पताल में साफ सफाई कर देता है। मरीजाें को डाक्टर नहीं होने की सूचना देकर लौटा देता है। शनिवार को अमर उजाला टीम सुबह 10.25 बजे गांव के अस्पताल पहुंची। देखा वहां पर कोई भी डाक्टर या एएनएम नहीं है। स्वीपर ने बताया कि यहां गुरुवार, शुक्रवार व शनिवार को ही डाक्टर आते हैं। शनिवार होने के बाद वहां कोई डाक्टर नहीं मिला। यहां पर चिकित्सक उमापति त्रिपाठी आते है लेकिन स्मार्ट कार्ड बनवाने में ड्यूटी लगी होने से अस्पताल नहीं आए। वह पत्यौरा पीएचसी में तैनात है। तीन गांव धुंधपुर, मौहर और कैंथी के लिए एक ही एएनएम तैनात है। ग्रामीणों ने बताया कि डाक्टर व फार्मासिस्ट नहीं होने पर लोगों को दूसरी जगह इलाज के लिए जाना पड़ रहा है।
इलाज नहीं मिलने पर मायूस होकर लौटे
अतरैया के हरप्रसाद पाल की पुत्री सावित्री अपने भाई अमित का इलाज कराने आई लेकिन चिकित्सक के न होने पर मायूस होकर लौट गई। उसने बताया कि उसके भाई को कई दिन से बुखार आ रहा है लेकिन अस्पताल आने के बाद उसे कोई राहत नहीं मिली।
छोपाछाप की शरण में जाना मजबूरी
कैंथी गांव के जोगेंद्र कुमार ने बताया कि वह बुखार से पीड़ित है। शनिवार को डाक्टर का दिन तय है, वह इलाज कराने आया था। लेकिन डाक्टर के न मिलने पर मजबूरी में उसे झोलाछाप का सहारा लेना पड़ेगा।
चिकित्सक नहीं तो सब बेकार
अतरैया निवासी राजनश्री ने बताया कि वह अपने दुधमुंही बच्ची प्राची को दिखाने आई है। लेकिन डाक्टर के न मिलने से उसकी बच्ची का इलाज नही हो सका। अस्पताल तो बहुत बड़ा है। लेकिन डाक्टर न होने से सब बेकार है।
स्थायी डाक्टरों की तैनाती हो
धुंधपुर प्रधान रंजीत निषाद ने बताया कि तीन दिन ही डाक्टर के बैठने से क्षेत्र के लोगों को पूरा लाभ नही मिल पा रहा है। चिकित्सक को परमानेंट यहीं पर तैनात किया जाए। ताकि लोगों को लाभ मिल सके।
पट्टी और बोतल का मांगा जा रहा पैसा
मौहर निवासी अवधेश वर्मा ने बताया कि चिकित्सक के न होने से मौजूद स्टाफ मनमानी करता है। पट्टी बांधने व बोतल चढ़ाने के नाम पर वसूली की जाती है। जिससे गरीबों को इलाज के लिए रिश्वत देनी पड़ती है।
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