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अफसरों को सुमति दे भगवान..

Hamirpur Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। बीहड़ी गांव कैथी में सड़क, पानी, बिजली जैसी सुविधाओं के लिए पांचवें दिन भी रामधुन की गई। पांचवे दिन भी अफसरों ने रामधुन नहीं सुनीं लेकिन ग्रामीणों की राम में पूरी आस्था है। उनका मानना है कि रामजी सभी जिम्मेदार अफसरों को एक दिन गांव जरूर बुला लेेंगे।
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चंद्रावल नदी किनारे स्थित बीहड़ी गांव कैंथी में आजादी के 65 साल बाद भी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। 6 हजार आबादी वाले इस गांव में खंभे है लेकिन बिजली नही, नदी में पुल बना है लेकिन एप्रोच मार्ग नहीं, अस्पताल है लेकिन डाक्टर नहीं, शिक्षा के लिए सिर्फ जूनियर तक विद्यालय है। पानी के लिए अभी भी लोग नदी और हैंडपंप के सहारे है। समस्याओं से आजिज आकर गांव के सभी लोग रामजी की शरण में चले गए है। ग्रामीणों का कहना है कि कोई सुने न सुने लेकिन रामजी जरूर सुनेंगे। इसी को लेकर गांव में रामधुन व शुद्धि बुद्धि यज्ञ किया गया। शनिवार को पांचवें दिन भी गांव में रामधुन कीर्तन हुआ। रामधुन कीर्तन में बच्चे, महिलाएं व पुरुष बराबर हिस्सा ले रहे हैं। 24 घंटे में 8 घंटे महिलाएं रामधुन करती हैं। ग्रामीण अरविंद, भूरा, संता, लल्लू खां, शिवकरन कुशवाहा का कहना है कि रामजी उनकी आवाज को जरूर सुनेंगे । इस मौके पर ग्रामीण गांधी जी की विशेष रामधुन रघुपति राघव राजा राम, पतित के पावन सीताराम, ईश्वर अल्लाह तेरे नाम सबको सुमति दे भगवान की धुन गूंजती रहती है।

स्वास्थ्य सुविधा का नहीं मिल रहा लाभ
भरूआसुमेरपुर। कैंथी गांव में मातृशिशु एवं परिवार कल्याण उपकेंद्र का भवन तैयार है। लेकिन चिकित्सको के न होने के चलते ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिला पा रहा है। अस्पताल के बाहर गांव के लोग अपने जानवर बांध रहे है। साथ ही अंदर लगा हैंडपंप ग्रामीणों को पानी भरने के काम आ रहा है। सेतु निगम द्वारा मार्च 2012 में पुल बनाकर लोनिवि को सौंप चुके है। लेकिन एप्रोच मार्ग न बने होने से आज भी लोगों को नदी में पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इस गांव में बिजली 1984 में लगाई गई थी। जिसके बिल जरूर आ रहे है। लेकिन गांव में बिजली नही पहुंच रही है। खंभे गड़े है, लेकिन तार नही है। मौहर गांव से कैंथी गांव के बीच की सड़क ध्वस्त हो चुकी है। जिससे नदी के किनारे तक पहुंचने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। नदी से गुजरने व खराब सड़क होने के चलते मरीज अस्पताल पहुंचने के पहले ही दम तोड़ चुके होते है।

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