बीआरडी कांडः मौन रहे, जुलूस निकालकर मांगी डॉक्टरों की रिहाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर। Updated Tue, 08 May 2018 12:41 AM IST
डॉक्टरों ने मौन जुलूस निकाला।
डॉक्टरों ने मौन जुलूस निकाला। - फोटो : Amar Ujala
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बीआरडी ऑक्सीजन कांड में आरोपी बनाए गए डॉक्टरों की रिहाई की मांग लेकर सोमवार को मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर लामबंद नजर आए। डॉक्टरों और विद्यार्थियों ने मौन जुलूस निकालकर आठ माह से जेल में बंद पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्र और एनस्थिसिया के विभागाध्यक्ष डॉ. सतीश को जमानत दिलाने की मांग की।
डॉक्टर सोमवार की सुबह 11 बजे मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार के पास स्थित बाबा राघव दास की प्रतिमा के सामने एकत्र हुए। वहां से डॉ. राजीव और डॉ. सतीश की रिहाई की मांग वाली तख्तियां लेकर परिसर के अलग-अलग हिस्सों में घूमने लगे। मेडिकल कॉलेज के मुख्य द्वार के बाहर आकर भी डॉक्टरों ने विरोध जताया। सबने डॉक्टरों की गिरफ्तारी को गलत बताया और कहा कि उन्हें जरूरत से ज्यादा सजा मिली है। अब डॉक्टरों के साथ ज्यादती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मौन जुलूस में डॉ. सतीश की पत्नी अनीता और बेटी पल्लवी भी शामिल हुईं। जुलूस निकालने वालों में डॉ. राजकिशोर सिंह, डॉ. रीना श्रीवास्तव, डॉ. शहबाज, डॉ. संतोष शर्मा, मेजर डॉ. एमक्यू बेग, डॉ. नरेंद्र देव, डॉ. अजय यादव, आईएमए के डॉ. अजय शुक्ल, डॉ. सुनील कमानी, डॉ. डीके सिंह आदि शामिल थे।

डॉ. पूर्णिमा सहित अन्य कर्मचारियों की चर्चा नहीं
मौन जुलूस निकालने वालों ने इस मामले में गिरफ्तार डॉ. पूर्णिमा शुक्ला, चीफ फार्मासिस्ट सहित चार कर्मचारियों की चर्चा नहीं की। सिर्फ डॉ. राजीव और डॉ. सतीश की रिहाई की मांग की गई। डॉक्टरों ने कहा कि पूर्व प्राचार्य डॉ. राजीव की तबीयत ज्यादा खराब है। अगर उन्हें बेहतर इलाज नहीं मिला तो दिक्कत और बढ़ जाएगी।

ये है मामला
10-11 अगस्त 2017 को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के बीच कई मासूमों और लोगों की मौत हो गई थी। हालांकि, शासन ने ऑक्सीजन खत्म होने से मौतें न होने की बात कही थी, लेकिन इस मामले में लापरवाही बरतने, कमीशनखोरी समेत अन्य कई आरोपों में तत्कालीन प्राचार्य समेत कुल नौ आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

दो को मिली बेल
बीआरडी ऑक्सीजन कांड मामले में गिरफ्तार और लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लायर फर्म पुष्पा सेल्स के मालिक मनीष भंडारी और डॉ. कफील खान को जमानत मिल चुकी है। दोनों जेल से बाहर हैं, जबकि सात आरोपी अभी जेल में हैं।


मेरे पति बेगुनाह, उन्हें फंसाया गया : अनीता
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हुए ऑक्सीजन कांड के आरोपी डॉ. सतीश को उनकी पत्नी अनीता और बेटी पल्लवी ने बेगुनाह बताया है। दोनों ने डॉ. सतीश पर लगे आरोपों को झूठा बताते हुए उनकी शीघ्र जमानत की मांग की। इस दौरान डॉ. सतीश की पत्नी कई बार फफक पड़ीं। उन्होंने कहा कि 27 साल की नौकरी के दौरान डॉ. सतीश पर एक भी दाग नहीं रहा। उनके पास तो भुगतान और खरीद का अधिकार भी नहीं था।

अनीता ने बताया कि डॉ. सतीश पर पहला आरोप है कि वह बिना बताए छुट्टी पर गए थे, जबकि डॉ. सतीश ने 11 से 17 अगस्त तक अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र दे रखा था। इस पर प्रिंसिपल के हस्ताक्षर भी थे। यह अवकाश उन्होंने आईआईटी मुंबई में पढ़ने वाले बेटे के दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होने के लिए लिया था। दुखद घटना की जानकारी मिलते ही वह गोरखपुर लौट आए और 13 अगस्त को ड्यूटी ज्वाइन कर ली।

डॉ. सतीश की बेटी पल्लवी ने कहा कि पापा एनेस्थिसिया के विभागाध्यक्ष के साथ मेंटीनेंस ऑफिसर थे। मेंटीनेंस ऑफिसर के तौर पर हार्डवेयर, मशीनरी, पाइपलाइन आदि के रखरखाव की जिम्मेदारी उनके पास थी। लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई अवरुद्ध होने को लेकर उन्होंने तीन और 10 अगस्त को मिले पत्र को उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया था। ऑक्सीजन खरीद और उसका ऑर्डर देने का अधिकार एसआईसी और प्राचार्य के पास था। नवजातों और बच्चों के इलाज में उनका कोई रोल नहीं था। ऑक्सीजन लॉग बुक दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी भी सीएमएस या एसआईसी की थी। इनकी देखरेख इसे फार्मासिस्ट लॉगबुक भरता है। अनीता और पल्लवी ने कहा कि जो आरोप लगाकर डॉ. सतीश को गिरफ्तार किया गया, वे सभी झूठे और मनगढ़ंत हैं।

डॉ. सतीश बीमार, पेट की हो चुकी है सर्जरी
डॉ. सतीश की पत्नी अनीता जेल में बंद पति सेहत का जिक्र करते हुए रो पड़ीं। बताया कि डॉ. सतीश की हाल ही में पेट की सर्जरी हुई थी। उनकी आंत का बड़ा हिस्सा काटकर निकाला जा चुका है। इसलिए डॉक्टर उन्हें थोड़ा-थोड़ा कई बार खिलाने को कह रखा है, लेकिन जेल में ऐसा संभव नहीं है। अगर शीघ्र उन्हें बाहर नहीं लाया गया तो उनकी जान को खतरा है। 

आईएमए भी समर्थन में 
प्रेसवार्ता में दोनों के साथ आए आईएमए के पदाधिकारी डॉ. सतीश के साथ डॉ. राजीव मिश्र की जमानत की मांग कर रहे थे। आईएमए के डॉ. अजय शुक्ल ने कहा कि जब डॉक्टर न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग दे रहे हैं तब उन्हें इस तरह से आठ माह से जेल में बंद रखना समझ से परे है। डॉ. शैलेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विपक्ष को चुप कराने के लिए डॉक्टरों को बलि का बकरा बनाया गया। डॉ. रत्नेश वर्मा ने कहा कि आरोप लगाने वाले मुकर चुके हैं। ऐसे में जेल में बंद बीमार डॉ. राजीव और डॉ. सतीश को जमानत न देना समझ से परे है।
 

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