गांव की चौपाल पर भांपते रहे सियासत की नजाकत

Gorakhpur Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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गोरखपुर। गांव के चौपाल का नजारा आम दिनों से कुछ अलग था। खेत खलिहान की बातें न घर परिवार की फिक्र। बातें हो रही थी बस सियासत की। चुनावी चर्चाओं में मशगूल प्रत्याशियों के समर्थक ही नहीं मतदाता भी पूरे दिन सियासत की नजाकत को भांपते नजर आए। उन्हें चिंता सिर्फ अपने बूथ की ही नहीं थी कि बल्कि पैनी नजर हर विधानसभा पर थी। शाम के वक्त शुरू हो गई जीत-हार की गणित। सबके अपने-अपने दावे थे ही और सबके पास अपना-अपना तर्क भी मौजूद था जिस पर वे अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर इतरा रहे थे।
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खजनी विधानसभा का सहसी गांव। सुबह के 11 बजे थे और गांव में घुसते ही एक पीपल के पेड़ के नीचे आठ-दस की संख्या में गांववाले मौजूद थे। कुछ समर्थक थे तो कुछ वोट डालकर आए थे। गांव के ही रत्नेश पांडेय ने चर्चा शुरू की, यहां त सब देखतअ बा, धनघटा में पता नाहीं केके अधिक वोट मिलत बा। इसी बीच शंभू कहते हैं, फोन आइल रहल, घबरइले क बात नाइखे। माहौल टाइट बा। फिर अपने बूथ की चर्चाएं शुरू होती है। फला टोला क वोट पड़ गइल बा, यहां के कुछ लोग ना डलले बाटें। यहां तो अच्छा वोट मिल जाई। इसी तरह दोपहर के दो बजे थे, हैंसर विधानसभा के मुखलिसपुर गांव में मेन रोड पर ही प्राथमिक स्कूल में मतदान केंद्र पड़ा था। स्कूल के थोड़ी दूर पर एक चाय की दुकान पर भीड़ जमा थी। चाय से ज्यादा वहां चुनावी चर्चा गरम थी। गांव के ही राजेश और विनय हार-जीत को लेकर अपना तर्क दे रहे थे। आसपास मौजूद लोग बड़ी इत्मीनान के साथ उनकी बातें सुनने में मशगूल थे। तभी राजेश ने मोबाइल फोन डायल किया और स्पीकर ऑन कर दिया। फोन खलीलाबाद सिटी में मिलाया गया था। दोनों से बातें शुरू हुई तो राजेश ने तपाक से पूछा, काहो केके वोट अधिक तुहरे यहां मिलत बा, जवाब वही मिला शायद जिसे सुनने के लिए राजेश ने फोन मिलाया था। फिर शुरू हो गई दूसरे विधानसभा की बातें। कुछ इसी तरह का नजारा हर तरफ देखने को मिला। सुबह शुरू हुई लोगों की सियासी गुफ्तगू देर शाम तक चलती रही। नतीजा भले ही कोई मानने को तैयार नहीं था लेकिन दावों में कोई कोर कसर नहीं था।
अपने बूथ पर अधिक वोट पाने को लगाया जोर
गोरखपुर। संतकबीरनगर के दो प्रत्याशियों ने अपने गांव में बढ़त बनाने के लिए पूरा जोर लगा दिया। इन्हें इस बात डर साल रहा था कि कहीं अपने गांव वाले बूथ पर कम वोट न पाएं। पिछले साल से सबक लेेेते हुए इन प्रत्याशियों और इनके घरवालों ने काफी समय अपने बूथ पर ही गुजारा। भाजपा प्रत्याशी शरद त्रिपाठी खजनी के झुड़िया के रहने वाले हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में शरद को अपने ही बूथ पर कम वोट मिले। इस बार चुनाव में शरद सुबह 10 बजे की करीब तीन दफा आए और समर्थकों का उत्साह बढ़ाते रहे। उनके पिता भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रमापतिराम त्रिपाठी भी बूथ पर डटे रहे और गांव के लोगों से मतदान करने का अनुरोध करते रहे। इसी तरह सपा के प्रत्याशी भालचंद यादव अपने गांव भगता में वोट डालने के बाद भी हालचाल लेने गए। उनके बेटे सुबोध यादव गांव के बूथ पर ही दोहर तक डटे रहे।
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