जंग खा रहीं जांच की बेशकीमती मशीनें

Gorakhpur Updated Wed, 29 Jan 2014 05:44 AM IST
गोरखपुर। मेडिकल कॉलेज में तीन साल पहले आई खून जांच की छह मशीनों की आज तक स्थापना नहीं हो सकी है। इनकी कीमत तकरीबन ढाई करोड़ है और ये जंग खा रही हैं, उधर मरीजों को प्राइवेट पैथालॉजी की शरण लेनी पड़ रही है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि संबंधित कंपनी से कई बार सम्पर्क साधा गया लेकिन उसने अनसुनी कर दी। अब उसे काली सूची में डालने को महानिदेशालय को पत्र लिखा गया है।
दरअसल इन मशीनों की खरीदारी की कारगुजारी आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज से जुड़ी है। 2009 में कॉलेज के लिए कई मशीनें खरीदी गईं, उनमें छह इलेक्ट्रोफोेरेसिस मशीनें भी शामिल थीं। 2010 में तत्कालीन सरकार ने इस मेडिकल कॉलेज को बंद करने का फैसला किया, इसी समय वहां मौजूद सारे सामानों को गोरखपुर, इलाहाबाद व अम्बेडकर नगर के मेडिकल कॉलेजों बांट देने का निर्णय भी ले लिया गया। सामानों के बंटवारे में चालीस-चालीस लाख रूपये की छह इलेक्ट्रोफोरेसिस मशीनें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के हिस्से में आईं। मशीनें तो कॉलेज में आ गईं, लेकिन वे आज तक दिखावे की वस्तु बनी हुई हैं। इनकी स्थापना के लिए कॉलेज प्रशासन द्वारा लगातार निदेशालय व संबंधित कंपनी को पत्र लिखा जाता रहा लेकिन नतीजा सिफर रहा। कंपनी द्वारा नजरअंदाज किए जाने से आजिज आकर कॉलेज प्रशासन ने अब महानिदेशालय को पत्र लिखकर कंपनी को काली सूची में डालने का अनुरोध किया है।

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