बीएड की छूटी परीक्षा नहीं होगी

Gorakhpur Updated Sat, 25 Jan 2014 05:44 AM IST
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों के बीएड सत्र 2012-13 की परीक्षा देने से वंचित विद्यार्थियों का साल बर्बाद हो गया। शुक्रवार की को हुई विश्वविद्यालय परीक्षा समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि अब इन जो विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे उनके लिए फिर से परीक्षा का आयोजन नहीं कराया जाएगा।
कई बार तिथि संशोधित होने केे बाद बीते 30 सितंबर से 22 अक्टूबर तक बीएड की परीक्षा कराई गई थी। अंतिम समय सारिणी से ठीक पहले जारी समय सारिणी में यह परीक्षा शाम की पाली से शुरू होनी थी जबकि नई समय सारिणी में परीक्षा सुबह की पाली से कराने का फैसला लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तिथि और समय तो बदल दिया पर उसे वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया। ऐसे में विश्वविद्यालय और कॉलेजों के पांच सौ से ज्यादा विद्यार्थी जब शाम की पाली में परीक्षा देने पहुंचे तो पता चला कि परीक्षा तो पहली पाली में ही हो गई। इस पर विद्यार्थियों ने हंगामा भी मचाया था, तब यह कहा गया था कि इस मसले पर विचार किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया था कि फैसला उनके हक में होगा। लेकिन शुक्रवार को कुलपति प्रो. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई परीक्षा समिति की बैठक में निर्णय हुआ कि अब 2012-13 की बीएड परीक्षा दोबारा नहीं कराई जाएगी। इसके पीछे तर्क दिया गया है कि विश्वविद्यालय 18 जनवरी को ही बीएड का परीक्षाफल घोषित कर चुका है।
बैठक में बीपीएड वर्ष 2012-13 की परीक्षा फार्म भरवाने, उपाधि लेखन का पारिश्रमिक बढ़ाने, पैसिफिक कॉलेज ऑफ फिजियोथिरेपी का परिणाम घोषित करने के लिए विधिक राय लेने का फैसला हुआ। अनुचित साधन नियमावली के पुनरावलोकन के लिए कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सुरेंद्र दुबे की अध्यक्षता में सभी संकाय प्रमुखों की कमेटी गठित की गई। यह नियमावली काफी पुरानी हो गई है। इसके अलावा वर्ष 13-14 की वार्षिक परीक्षा की समय सारिणी तैयार करने के लिए सभी संकाय प्रमुखों की समिति गठित की गई।
सामूहिक नकल का प्रकरण हल करने को समिति गठित
गोरखपुर। सामूहिक नकल के परीक्षाफल घोषित करते समय पूर्णांक में से 40 प्रतिशत की कटौती न करने के नियम को शिथिल करने के लिए कुलपति ने सभी संकाय प्रमुख की समिति गठित कर दी है। समिति की रिपोर्ट को कार्यपरिषद में रखा जाएगा। कार्यपरिषद ही इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय करेगी तब अगले सत्र से नया नियम लागू होगा। बता दें कि गोरखपुर विश्वविद्यालय में सामूहिक नकल के प्रकरण में परीक्षाफल घोषित करने के लिए पूर्णांक से 40 प्रतिशत की कटौती का नियम है। इसकी जानकारी होने पर अक्टूबर और नवंबर में हुई कार्यपरिषद की बैठक में परिषद के सदस्य और डुमरियागंज के कांग्रेस सांसद जगदंबिका पाल ने इस पर आपत्ति की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसा तो अन्य किसी विश्वविद्यालय में नहीं है। कार्यपरिषद के एक अन्य सदस्य महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राजनीति शास्त्र के प्रो. सतीश राय ने भी सहमति जताई थी। दोनों कार्यपरिषद सदस्य के तर्क से तत्कालीन कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी भी सहमत थे और कहा था कि यह विद्यार्थीहित में नहीं है। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे को परीक्षा समिति में ले जा कर निर्णय किया जाएगा।

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