जीडीए की नजर में शहर के सभी मोबाइल टॉवर वैध

Gorakhpur Updated Wed, 27 Nov 2013 05:41 AM IST
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गोरखपुर। शहर में तेजी से बढ़ रहे मोबाइल टॉवरों को जीडीए ने अब वैध मान लिया है। कमिश्नर जेपी गुप्ता के निर्देश पर कुछ समय पहले शुरू हुआ मोबाइल टॉवरों का सर्वे रोक दिया गया है। अफसरों का कहना है कि मोबाइल टॉवर अगर अवैध हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी डीओटी (डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम) की है, जीडीए या प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।पूर्व कमिश्नर के. रवींद्र नायक के निर्देश पर जीडीए ने ही पिछले साल सर्वे करके नक्शा पास न होने के आधार पर शहर में लगे 296 टॉवर अवैध बताए थे। यही नहीं एयरफोर्स क्षेत्र के करीब 10 मोबाइल टॉवर सील करते हुए जीडीए ने की बिजली विभाग को सभी अवैध टॉवर की लाइट काटने को भी पत्र लिखा था। ‘अमर उजाला’ के 23 सितंबर 2012 के अंक में प्रकाशित मोबाइल टॉवर पर केंद्रित खबर में पूर्व कमिश्नर के रवींद्र नायक, तत्कालीन जीडीए वीसी सर्वेश चंद्र मिश्र और बिजली विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता एके श्रीवास्तव ने 296 टॉवर अवैध होने और उनसे जन्म लेने वाले खतरों की स्वीकारोक्ति भी की थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि जीडीए के जिम्मेदार अभी सही बोल रहे हैं या उस समय गलत बोल रहे थे।मंगलवार को जीडीए बोर्ड बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कमिश्नर जेपी गुप्ता और जीडीए उपाध्यक्ष हृदय शंकर तिवारी ने कहा कि मोबाइल टॉवर को लेकर जारी गाइडलाइन इतनी लचीली है कि टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की ही नहीं जा सकती। इनके खिलाफ डीओटी ही कार्रवाई कर सकता है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कमजोर मकान पर टॉवर स्थापित करने या न करने की जिम्मेदारी संबंधित मकान मालिक की है, जीडीए की नहीं। नक्शा पास करने की जिम्मेदारी किसकी है, इस सवाल को वे टाल गए। कमिश्नर ने कहा कि मानक देखने के बाद ही यह निर्णय किया गया है। मानक की कॉपी उपलब्ध कराने के अनुरोध पर उन्होंने बाद में दिखा देने की बात कही।
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मोबाइल टॉवर लगाने के नियम
- रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की अनापत्ति जरूरी
- शिक्षण और चिकित्सा संस्थानों की छत पर मनाही
- अनधिकृत भवनों की छत पर नहीं लगाए जा सकते
- संकरी गलियों के भवनों की छतों पर भी मनाही
- जेनरेटर कक्ष साइलेंट प्रकृति का हो और भूतल पर लगाया जाए
- पंजीकृत आर्किटेक्ट और अधिकृत स्ट्रक्चरल इंजीनियर का प्रमाणपत्र जरूरी
- टॉवर छत से फर्श पर सीधे नहीं बल्कि तीन मीटर ऊंचे प्लेटफॉर्म पर लगें
- हवाई अड्डे के नजदीक एयरपोर्ट अथॉरिटी का भी एनओसी जरूरी
- क्षति की दशा में क्षतिपूूर्ति का हलफनामा भी दिया जाए
- टावर क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से वायर फेंसिंग जरूरी
- आरएफ विकिरण कृपया प्रवेश न करें, इस बात का बोर्ड लगाना भी जरूरी है
सेल्युलर कंपनियाें को मोबाइल टॉवर लगाने के लिए एयरफोर्स, रेलवे, दूरदर्शन और पुलिस समेत करीब दर्जन भर विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होता है। इसके लिए वे डीओटी में आवेदन करते हैं और संबंधित विभागों की रजामंदी मिलने के बाद ही टॉवर लगाए जा सकते हैं।
- टीएन शुक्ला, वरिष्ठ महाप्रबंधक, बीएसएनएल
हटेगी मोहद्दीपुर पुलिस चौकी, राजघाट पुल पर लगेगी जाली
गोरखपुर। जीडीए बोर्ड की मंगलवार को हुई 97वीं बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय किए गए। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में तय हुआ कि मोहद्दीपुर पुलिस चौकी को बीच चौराहे से हटाया जाएगा। इसे पुन: स्थापित करने के लिए चौराहे के किनारे ही नगर निगम जमीन देगा और जीडीए पुलिस चौकी का निर्माण कराएगा।
बोर्ड के अध्यक्ष/कमिश्नर जेपी गुप्ता ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि जीडीए चौराहे का सुंदरीकरण भी कराएगा। करीब आठ माह में निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। बता दें कि बीते दो साल से इस पुलिस चौकी को सड़क पर से हटाने के लिए कई बार रणनीति बनी लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं शुरू हो सकी। बोर्ड में इस प्रस्ताव के पास हो जाने के बाद उम्मीद जगी है कि अब चौकी हटा दी जाएगी। यह पुलिस चौकी मोहद्दपुर में जाम की प्रमुख वजह है।
इसी तरह राजघाट पुल से नदी में कू दकर जान देने की घटनाएं बढ़ने पर जीडीए बोर्ड ने दोनों पुलों के किनारे लोहे की जाली लगाने का निर्णय किया। कमिश्नर का कहना है कि यह काम भी जल्द शुरू हो जाएगा। बैठक में जीडीए के वित्तीय वर्ष 2013-14 के आय-व्यय का लक्ष्य भी रिवाइज करने पर सहमति बनी। कमिश्नर के मुताबिक आय का टारगेट अब 94.44 करोड़ से बढ़ाकर 108 करोड़ कर दिया गया जबकि व्यय का लक्ष्य 92.67 करोड़ से बढ़ाकर 106.44 करोड़ कर दिया गया।
बैठक में जीडीए की 51 फ्लॉप संपत्तियों के बारे में कोई फैसला नहीं हो सका। प्रस्ताव में इस बात की जानकारी नहीं दर्ज होने पर कि इन संपत्तियों को बेचने के लिए कब-कब विज्ञापन निकाले गए थे, कमिश्नर ने इस प्रस्ताव को अगली बैठक में शामिल करने का निर्देश दिया। इसी तरह आठ लाख की लागत से एक पोकलेन मशीन खरीदने के प्रस्ताव भी मुहर लग गई।
मुश्किल में पड़ सकते हैं बिल्डर
मेडिकल कॉलेज के पास अपार्टमेंट बनवा रहे बिल्डर मुश्किल में पड़ सकते हैं। जीडीए बोर्ड बैठक के दौरान जीडीए बोर्ड के नामित सदस्य एवं सपा नेता दिनेश गुप्ता ने महायोजना-2021 के 30 मीटर के दायरे में ही अपार्टमेंट बनने का मामला उठाया। कमिश्नर ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि जीडीए की महायोजना के 30 मीटर के दायरे में कोई नक्शा पास ही नहीं हो सकता। उन्होंने जीडीए उपाध्यक्ष हृदय शंकर तिवारी को एक टीम गठित कर मामले की जांच कराने का निर्देश दिया। संवाददाताओं से बातचीत में कमिश्नर ने बताया कि टीम मौके पर जाकर मामले की जांच करेगी। अगर महायोजना की सड़क के 30 मीटर के दायरे में निर्माण की बात सही निकली तो निर्माण कार्य रोकने के साथ ही संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि महायोजना की सड़क से सटे ही अपार्टमेंट के कुछ टॉवर लगाए जा रहे थे।
जेल प्रशासन से लेना होगा एनओसी
बोर्ड बैठक के दौरान यह भी तय हुआ कि जेल परिसर के 100 फीट के दायरे में किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए जेल प्रशासन से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। दरअसल, जीडीए बोर्ड की पिछली बैठक में इस मामले को लेकर काफ ी बहस हुई थी कि जेल के 500 मीटर के दायरे में निर्माण के लिए जेल प्रशासन से एनओसी अनिवार्य होगी। कोई निर्णय नहीं हो पाने पर जीडीए ने वरिष्ठ अधीक्षक मंडल कारागार को पत्र लिखा था। उनके जवाब में कहा गया कि 100 फीट के दायरे में ही निर्माण के लिए एनओसी अनिवार्य है।
निगम की भी सड़क बनवाएगा जीडीए
बैठक के दौरान नगर निगम के अनुरोध पर जीडीए ने पांच करोड़ रुपये तक के सड़क निर्माण पर अपनी सहमति जताई है। कमिश्नर ने कहा कि निगम से मिली 12 सड़कों की सूची में से पांच करोड़ की लागत तक की सड़कों के निर्माण के लिए परीक्षण कराने का निर्देश दे दिया गया है। अगर फंड की कमी नहीं हुई तो जीडीए, निगम की यह सड़कें बनवा देगा।
गोड़धइया नाले से हटेगा कब्जा
बोर्ड बैठक में सदस्यों ने गोड़धइया नाला समेत कई स्थानों पर कब्जा होने का भी मामला उठाया। इस पर कमिश्नर ने अफसरों की एक टीम बनाकर कब्जा चिह्नित करने तथा उसे तत्काल हटाने का निर्देश दिया।
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