कठिन परिश्रम से ही धावक जीत सकते हैं मेडल

Gorakhpur Updated Tue, 26 Nov 2013 05:42 AM IST
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गोरखपुर। एथलेटिक्स में कठिन परिश्रम करने से ही धावक मेडल जीत सकते हैं। शॉर्टकट से कोई भी खिलाड़ी उस मुकाम पर नहीं पहुंच सकता जहां वह पहुंचना चाहता है। अब सरकार की तरफ से भी संसाधनों की कमी नहीं होने दी जा रही है लेकिन उसके बावजूद ओलंपिक जैसी स्पर्धा में एथलेटिक्स में मेडल नहीं मिल रहे है। यह बातें गोल्डन बूट अवार्ड से सम्मानित 1978 में एशिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीट रहे पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार विजेता श्रीराम सिंह ने कहीं। गोरखपुर यूनिवर्सिटी के वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल होने के लिए वह सोमवार की रात गोरखपुर पहुंचे श्री सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि एथलेटिक्स अन्य खेलों के मुकाबले अभी बहुत पीछे है। इसका सबसे बड़ा कारण युवाओं का मेहनत नहीं करना है। ट्रैक की रेस में जब तक आप कठिन परिश्रम नहीं करेंगे मेडल नहीं जीत सकते। खेल को बढ़ावा देने के लिए प्राइमरी स्तर से शुरुआत करनी होगी। स्कूली स्तर पर इसे बाकायदा एक विषय रूप में पेश करना होगा। उन्होंने कहा कि उनके समय में न तो सुविधाएं थी और न ही सरकार से कोई मदद मिलती थी। लेकिन इसके बावजूद खिलाड़ी पदक जीतते थे। भाग मिल्खा भाग फिल्म पर चर्चा करते हुए श्रीराम सिंह ने बताया कि फिल्म ने युवाओं ने जोश भरने का काम किया है। कहा, एक अच्छा खिलाड़ी तभी बन सकता है जब उसका कोच के प्रति पूरा विश्वास हो।
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उपलब्धियों पर एक नजर
श्रीराम सिंह ने 1970, 1974 तथा 1978 के एशियाई खेलों में दो स्वर्ण तथा तीन रजत पदक जीते। 1975 में सियोल में आयोजित एशियन ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में तीन स्वर्ण जीतकर उन्होंने शानदार उपलब्धि हासिल की थी। उन्हें 1978 में एशिया के सर्वश्रेष्ठ एथलीट का गोल्डन बूट अवार्ड, 1973 में अर्जुन पुरस्कार तथा 1992 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
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