विदेशी आक्रमणों से कमजोर हुई स्त्री

Gorakhpur Updated Tue, 26 Nov 2013 05:41 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
गोरखपुर। विदेशी आक्रमणों और वाह्य तत्वों के भारतीय समाज में समावेश जैसे कारकों के चलते स्त्री कमजोर हुई। लेकिन स्वाधीनता आंदोलन में नारी को पुन: सम्मान मिला और उसके बाद नारी स्वत: अपने सम्मान और स्वतंत्रता के लिए अग्रसर है। यह कहना है इलाहाबाद विश्वविद्यालय के इतिहासविद् प्रो. हरिनारायण दुबे का। वह गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग में सोमवार से शुरू दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। नारी अतीत से वर्तमान तक विषयक इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. दुबे ने कहा कि प्राचीन भारतीय समाज में नारी संबंधी अध्ययन सिद्ध करते हैं कि समाज के विभिन्न वर्गों में नारी की स्थिति के कई स्तर थे। संभ्रांत वर्ग में जहां नारी की पूर्ण प्रतिष्ठा थी और उसे पर्याप्त सुरक्षा भी मुहैया थी। मध्यम वर्गीय समाज में पितृसत्तात्मक व्यवस्था के चलते वह अपेक्षाकृत हीन अवस्था में थी जबकि निम्न वर्ग में सभी प्रकार की सामाजिक और आर्थिक सहभागिता के कारण वह स्वतंत्र और बेहतर स्थिति में थी। सातवाहन और गुप्त काल में नारी उच्च आदर्शात्मक और आध्यात्मिक अवस्था में थी। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र की विशिष्ट अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय की इतिहास एवं संस्कृति विभाग की अध्यक्ष प्रो. विभा उपाध्याय ने इस मत का प्रतिवाद किया कि भारत में स्त्री विमर्श नहीं था और उसे विदेशियों ने शुरू कराया। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से ही देश में नारी विमर्श था और इस पर पर्याप्त इतिहास लेखन हुआ है। संगोष्ठी के अध्यक्ष गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने भारतीय ऋषियों के नारी चिंतन की चर्चा करते हुए कहा कि ऋषियों के चिंतन में नारी सद्गुणों की खान है। जननी, अर्द्धांगिनी, देवी जैसे नाम उसके गुण और स्वभाव के कारण हैं। नारी सशक्तिकरण का आंदोलन इसी की कड़ी है। किंतु महिलाओं पर हो रहे अत्याचार, सभ्य समाज के लक्षण नहीं हैं। इससे पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. विपुला दुबे ने अतिथियों के स्वागत के साथ विषय प्रवर्तन किया। संचालन आयोजन सचिव डॉ. दिग्विजय नाथ ने किया और गोष्ठी के सह संयोजक प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने आभार जताया। संगोष्ठी के दो सत्रों में 15 शोध पत्र पढ़े गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us