यूनिवर्सिटी से सड़क तक छात्रों का बवाल

Gorakhpur Updated Mon, 25 Nov 2013 05:41 AM IST
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गोरखपुर। बृहस्पतिवार शाम यूनिवर्सिटी के आंदोलनरत छात्रों पर लाठीचार्ज ने विद्यार्थियों के बीच शुक्रवार की सुबह का एजेंडा आक्रामकता लेकर आया। डिग्री कॉलेजों में छात्रों ने खुद ही छुट्टी का ऐलान किया और देखते-देखते यूनिवर्सिटी रोड छात्रों की भीड़ में घिर गई। भीड़ के साथ आक्रामकता बढ़ती गई और फिर छात्रों के अलग-अलग गुट कहीं पथराव तो कहीं तोड़फोड़ करते नजर आए।
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चूंकि विद्यार्थियों का हुजूम इतना बड़ा था कि उन्हें एक बिंदु पर संभालना या समझाना मुमकिन नहीं था। यह चुनौती पुलिस के लिए नहीं बल्कि तमाम उन छात्र नेताओं के लिए भी थी, जो पुनर्मूल्यांकन की मांग को हकीकत की शक्ल दिलाकर तमाम विद्यार्थियों के भविष्य पर उठे सवालों का हल चाहते हैं। बड़ी छात्र संख्या ने यूनिवर्सिटी रोड और छात्र संघ चौराहे को छात्रमय जरूर कर दिया मगर इससे जन्म लेने वाला आंदोलन पूरी तरह नेतृत्व विहीन रहा। पहले छात्र अलग-अलग टीमों में बंटे और फिर अपनी मांग को वजनदार ढंग से उठाने की बजाय छात्रों के बीच ज्यादा से ज्यादा उग्रता प्रदर्शित करने की होड़ नजर आने लगी। यही वजह थी कि यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक भवन के पास कुछ छात्रों का क्रमिक अनशन जारी था तो उसके आसपास कुछ अन्य छात्र प्रदर्शन, कक्षाओं की छुट्टी कराने और फिर चीफ प्रॉक्टर कक्ष के बाहर रखे गमलों पर गुस्सा उतराने में मशगूल रहे।
बात यहीं नहीं थमी यूनिवर्सिटी गेट पर जमा हुए छात्रों ने बाहर से गुजरती रोडवेज पर पथराव किया तो इस बीच छात्रों की एक अन्य टीम ने वीसी आवास और उसके बाद एक अन्य रोडवेज को निशाने पर लेकर पत्थर बरसाए। कुछ छात्रों ने गोपनीय विभाग को भी अपने गुस्से का शिकार बनाया। अलग-अलग हिस्सों में कुछ देर के भीतर ही सामने आईं छात्रों की भीड़ की ऐसी गतिविधियों के कारण शुरुआत में मौके पर मौजूद पुलिस मूकदर्शक बनकर रह गई। एक दिन पहले लाठीचार्ज का मुद्दा गर्माने का दबाव भी शुरुआत में पुलिस के कदमों को आगे बढ़ने से रोक रहा था। थोड़ी देर के लिए एसएसपी प्रदीप कुमार और एडीएम सिटी बद्रीनाथ भी पहुंचे लेकिन वह भी पुलिस चौकी के पास गुफ्तगू करके लौट गए।
पुलिस का रुख तब बदला जब यूनिवर्सिटी के भीतर कुछ छात्रों के एएसपी अजय पांडेय की गाड़ी घेरकर पथराव करने से। इस सूचना के कुछ देर बाद ही डीएम और एसएसपी मौके पर पहुंचे और साथ मौजूद एस्कॉर्ट के साथ डंडे लेकर छात्रों को दौड़ाना शुरू कर दिया। यह देख अन्य पुलिस कर्मियों ने भी लाठियां उठा लीं और एकाएक लाठियां बरसने से पहले भगदड़ मची और कुछ मिनटों में ही पूरी भीड़ छंट गई। हालांकि भीड़ जुटने से लेकर हुजूम छंटने तक में पांच घंटे का समय लगा और इस बीच यूनिवर्सिटी रोड आम लोगों और वाहनों के लिए बंद रहा।

लाठीचार्ज के लिए वीसी और एसपी सिटी दोषी
गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की महानगर इकाई ने छात्रों पर लाठीचार्ज के लिए कुलपति को दोषी ठहराते हुए कहा कि उनके इशारे पर ही एसपी सिटी ने लाठीचार्ज कराया। परिषद सदस्यों ने कुलपति और एसपी सिटी को हटाने की मांग करते हुए इस मामले में राज्य सरकार के विरुद्ध आंदोलन की चेतावनी दी है। इस मामले में बेतियाहाता कार्यालय पर बैठक में सभी कॉलेजों की परिषद इकाई के पदाधिकारी मौजूद थे। बैठक को निशांत सिंह, सुधांशु रंजन त्रिपाठी, अखिलेश दुबे, चंद्र बदन त्रिपाठी, विश्वराज सिंह, शनी अग्रहरि, रवि प्रकाश माझी, योगेश्वर नाथ पांडेय, हरिओम पासवान, नेहा मणि आदि ने संबोधित किया।
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पूरे घटनाक्रम के लिए यूनिवर्सिटी जिम्मेदार
गोरखपुर। विश्वविद्यालय के संस्थापक एसएनएम त्रिपाठी के पुत्र अवकाश प्राप्त उप थल सेना अध्यक्ष और देवरिया के पूर्व सांसद लेफ्टीनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी ने पूरे घटनाक्रम के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को जिम्मेदार बताया है।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसी परिस्थितियां पैदा कर दीं, जिसके चलते विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। श्री त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि यह कैसी व्यवस्था है कि कॉपी कोई जांचे और मार्कशीट कोई और बनाए। किसी एजेंसी से क्रॉस लिस्ट और मार्कशीट बनवाने की जगह यह काम शिक्षक क्यों नहीं करते। उन्होंने इस स्थिति के पीछे आर्थिक अनियमितता का शक भी जताया। कहा कि अगर विद्यार्थियों को हासिल हुए शून्य नंबर को सच मानें तो इसके लिए भी पढ़ाई न कराने के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ही दोषी है। विश्वविद्यालय प्रशासन को इस सच को स्वीकारते हुए विद्यार्थियों को जल्द से जल्द न्याय देना चाहिए।
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किसके आदेश पर किसने कराया लाठीचार्ज
गोरखपुर। विश्वविद्यालय परिसर से शुरू हुए आंदोलन में लाठीचार्ज और उसके बाद छात्रों के उग्र होने पर की स्थितियों पर जिले के कामकाज की समीक्षा को आए प्रमुख सचिव और डीएम ने भी हैरानी जताई है। सर्किट हाउस पहुंचे चीफ प्रॉक्टर से दोनों अधिकारियों ने पूछा कि किसके आदेश पर किसने लाठीचार्ज कराया है?, साथ ही फैसला सुनाया कि भविष्य में बगैर मजिस्ट्रेट के आदेश पर यूनिवर्सिटी परिसर में पुलिस नहीं जाएगी।
तोड़फोड़, बवाल और फिर लाठीचार्ज के बाद एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह मनीष सिंह, अंकित कुमार, नेत्रहीन छात्र रामसूरत, संदीप, चंदन दुबे, हर्षिका सिंह, अंजू मणि त्रिपाठी, प्रगति आदि के साथ सर्किट हाउस पहुंचे और प्रमुख सचिव बीएम मी से मिल। विद्यार्थियों को सुनने के बाद प्रमुख सचिव और डीएम ने चीफ प्रॉक्टर ओपी पांडेय की भूमिका पर सवाल उठाए। प्रमुख सचिव ने इस मामले को राजभवन तक पहुंचाने की बात कही। डीएम ने बताया कि उनकी ओर से शासन को पत्र भेजा जा रहा है। आला अफसरों की ओर से लाठीचार्ज के फैसले पर सवाल उठाते ही सभी ने चुप्पी साध ली। अपना अपना पल्ला झाड़कर सभी यह फैसला दूसरे की ओर खिसकाते नजर आए। एडीएम सिटी ने कहा कि जब वह पहुंचे तब तक सब कुछ हो चुका था। चीफ प्रॉक्टर ने भी लाठीचार्ज कराने से इंकार कर दिया।
डीएम ने लाठीचार्ज के लिए फिलहाल चीफ प्रॉक्टर को जिम्मेदार मानते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी विवाद की सूचना समय से मजिस्ट्रेट को दें। बिना मजिस्ट्रेट के निर्णय के पुलिस यूनिवर्सिटी में नहीं जाएगी। एडीएम (सिटी) को इसके लिए नामित किया है। डीएम ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के विद्यार्थियों की समस्या का हल निकालने के लिए शासन को पत्र भेजा है। शनिवार को प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा से वार्ता की जाएगी।

आज यूनिवर्सिटी में नहीं होगी पढ़ाई
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में शनिवार को पढ़ाई नहीं होगी। कुलसचिव शैलेश शुक्ल ने यह जानकारी दी। बताया कि अपरिहार्य कारण से यह निर्णय लिया गया है। हालांकि माना जा रहा है कि विद्यार्थियों के आंदोलन के कारण ही यह निर्णय लिया गया है। कुलसचिव ने 1987 में शासन से राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों में पुनर्मूल्यांकन पर रोक की बात दोहराई है। कहा है कि संबद्ध कॉलेजों के विद्यार्थियों के मामले में शासन और कुलाधिपति का निर्देश हासिल करने के लिए 20 नवंबर को प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा और प्रमुख सचिव कुलाधिपति को फैक्स भेजा जा चुका है।
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