जरूरी सेवाएं बहाल, कुछ दफ्तरों में ताला

Gorakhpur Updated Fri, 22 Nov 2013 05:41 AM IST
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गोरखपुर। राज्य कर्मचारियों ने जरूरी सेवाओं को हड़ताल से अलग कर दिया है। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में पैथालॉजी सेंटर खुले रहे और सामान्य दिनों की तरह जांच हुई। मेडिकल कॉलेज में भी कर्मचारियों ने काम किया। पांच दिन बाद रजिस्ट्री और ट्रेजरी दफ्तर भी पूरे दिन खुले रहे। हालांकि शासन से बातचीत में कर्मचारियों द्वारा आकस्मिक सेवाएं बहाल किए जाने पर राजी होने की जानकारी के अभाव में सामान्य दिनों की तुलना में जिला अस्पताल में मरीजों भीड़ थोड़ी कम दिखी।
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एआईजी स्टांप राकेश शुक्ला के अनुसार बृहस्पतिवार को शहर क्षेत्र में 71 बैनामे हुए जिनसे 57 लाख रुपये की आय हुई। इसी तरह रजिस्ट्री से करीब 80 लाख रुपये की आय हुई है। करीब 9 दिन बाद ट्रेजरी दफ्तर में भी चहल-पहल दिखी और करीब एक करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। उधर, तय कार्यक्रम के अनुसार सुबह 11 बजे कर्मचारी विकास भवन पर जुटे। एक तरफ सभा शुरू हुई तो दूसरी तरफ एक जत्था मोटरसाइकिल से खुले हुए दफ्तरों को बंद कराने निकला। सिंचाई, लोक निर्माण, वन और शिक्षा विभाग समेत विकास भवन स्थित सभी विभागों के दफ्तर बंद कराए।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रूपेश श्रीवास्तव और बीआरडी मेडिकल कॉलेज कर्मचारी संघ के अध्यक्ष मदन मोहन यादव का कहना है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक सेवाओं को हड़ताल से मुक्त रखने का निर्णय किया गया है लेकिन सरकार इसे कर्मचारियों की कमजोरी न माने । उन्होंने बताया कि शुक्रवार से नर्स काली पट्टी बांधकर काम करेंगी और अगर जरूरत पड़ी तो दूसरे कर्मचारी भी पुन: हड़ताल में शामिल हो जाएंगे।
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एस्मा लागू कर टकराव चाहती है प्रदेश सरकार
भाजपा नेताओं ने हड़ताल कर रहे राज्य कर्मचारियों का समर्थन करते हुए प्रदेश सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया है। क्षेत्रीय अध्यक्ष उपेंद्र दत्त शुक्ल ने कहा कि सरकार बातचीत की बजाय एस्मा लागू कर बेवजह टकराव का रास्ता तय कर रही है। हठधर्मिता छोड़ सरकार बातचीत करे ताकि समाधान हो सके। कर्मचारियों का अनावश्यक उत्पीड़न किया गया तो भाजपा चुप नहीं बैठेगी। क्षेत्रीय उपाध्यक्ष दुर्गा राय और क्षेत्रीय प्रवक्ता डॉ. सत्येंद्र सिन्हा ने कहा कि 10 दिनों की हड़ताल के बाद भी सरकार अभी तक निष्क्रिय और निश्चिंत है।
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