यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज, कई चोटिल

Gorakhpur Updated Fri, 22 Nov 2013 05:41 AM IST
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गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी एवं संबद्ध कालेजों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग लेकर आंदोलनरत विद्यार्थियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कुछ विद्यार्थी चोटिल हुए हैं, जबकि भगदड़ के बीच घबराकर एक छात्रा बेहोश हो गई।
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तीन दिन से क्रमिक धरना दे रहे यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बृहस्पतिवार से आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया था। समझाए जाने पर विद्यार्थी अपने आंदोलन को क्रमिक अनशन में तब्दील करने पर रजामंद हो गए थे। शाम को विद्यार्थियों ने कैंडल मार्च निकाला। कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में छात्राएं भी शामिल रहीं। इस बीच पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने विद्यार्थियों के क्रमिक अनशन में रात के समय छात्राओं को न रोके जाने पर दबाव बनाया। बताते हैं कि इसके लिए आंदोलनरत विद्यार्थियों ने हामी पर दी मगर कैंडल मार्च पूरा होने के बाद विद्यार्थी धरना स्थल की ओर बढ़ने लगे। छात्राओं को रात में धरना स्थल पर रोकने का हवाला देते हुए पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की। इस पर आपत्ति जताते हुए विद्यार्थी ने धरना स्थल तक जाने की कोशिश जारी रखी। समूह में मौजूद विद्यार्थियों के दबाव को देख पुलिस ने एकाएक लाठी बरसानी शुरू कर दीं। इससे विद्यार्थियों में भगदड़ मच गई। लाठी और भगदड़ की चपेट में आकर कई कर्मवीर सिंह, कृष्ण मोहन शाही, मनीष सिंह, अपर्णा मिश्रा, प्रगति श्रीवास्तव समेत कई विद्यार्थी चोटिल हो गए, जबकि संध्या यादव घबराहट में बेहोश हो गई।
इसकी जानकारी मिलते ही हॉस्टल के तमाम छात्र और शहर के कई विद्यार्थी भी यूनिवर्सिटी पहुंच गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। प्रदर्शकारी एसपी सिटी पर लाठीचार्ज कराने का आरोप लगा रहे थे। उनके बीच से एसपी सिटी और चीफ प्रॉक्टर को हटाने की मांग शुरू कर दी। उनका कहना था कि वे रात भर धरने पर बैठने के लिए नहीं बल्कि वहां रखे अपने बैग लेने जा रहे थे लेकिन पुलिस ने समझे बिना उन पर लाठियां बरसा दीं। कुछ देर में मेयर डॉ. सत्या पांडेय वहां पहुंची। बेहोश हुई संध्या यादव को अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचवाया। मेयर ने यूनिवर्सिटी और पुलिस प्रशासन के रवैये की निंदा करते हुए पूरा मामला लखनऊ से आ रहे प्रमुख सचिव के सामने रखने की बात कही है। मौके पर पहुंचे एडीएम सिटी ने मामले की जांच कराने का भरोसा दिया। इस आश्वासन पर छात्राएं घर वापस हो गईं, जबकि कुछ छात्रों ने बेमियादी आंदोलन के ऐलान के साथ प्रशासनिक भवन पर धरना शुरू कर दिया।
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