निगम में मची खलबली, मेयर ने कार्रवाई को लिखा पत्र

Gorakhpur Updated Thu, 21 Nov 2013 05:40 AM IST
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गोरखपुर। नियम कानून की अनदेखी कर बिल्डर से जमीन की अदला-बदली का मामला गरमा गया है। मेयर डॉ सत्या पाण्डेय ने बुधवार को कमिश्नर जेपी गुप्ता और नगर आयुक्त राजेश कुमार त्यागी को पत्र लिखकर पूरे मामले की फिर से जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया है।
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मेयर ने आला अफसरों से अपेक्षा जताई है कि वे मौके का निरीक्षण कर उस पर हो रहे निर्माण को तत्काल रुकवाएं। यह भी सुनिश्चित करें कि इस मामले में अंतिम निर्णय होने तक वहां निर्माण न हो सके।
बता दें कि नगर निगम और जिला प्रशासन में जिम्मेदार पदों पर रहे कुछ अफसरों ने नियमों को दरकिनार करके कीमती सरकारी जमीन की निजी शख्स की जमीन से नियम विरुद्ध तरीके से अदला बदली करा दी थी। जमीनों के इस बदलवा में मेडिकल कालेज के पास सलेमपुर उर्फ मुगलपुर स्थित नगर निगम की मुख्य रोड से सटी करीब 81 डिसमिल जमीन बिल्डर के कब्जे में पहुंच गई थी, जबकि काफी पीछे क ी ऐसी जमीन नगर निगम के खाते में आई थी, जहां पहुंचने के लिए सीधा और साफ रास्ता भी नहीं था। यही नहीं नगर निगम के हाथ आई जमीन के ऊपर से 33 केबी की हाईटेंशन लाइन भी गुजर रही है।
सूत्र बताते हैं कि लंबे समय से चल रहे इस मामले में कई स्तर से इसकी जांच हुई मगर ज्यादातर की रिपोर्ट बिल्डर के पक्ष में रही। निवर्तमान नगर आयुक्त अखिलेश तिवारी की रिपोर्ट ने इस पूरे मामले की पोल खोल दी थी। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में इसे बड़ी तिकड़म मानते हुए इस तरह से जमीन की अदला-बदली को सरकार और नगर निगम दोनों के हितों के प्रतिकूल बताया था। बिना दाखिल खारिज हुए ही जीडीए ने नक्शा पास कर दिया। शिकायत हुई तो फिर दाखिल खारिज की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। डीएम रवि कुमार एनजी ने इस मामले में हस्तक्षेप किया और बाद में उन्होंने दाखिल खारिज भी निरस्त कर दिया था। कमिश्नर भी इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रमुख सचिव आवास विकास को पत्र लिख चुके हैं।

यूं हाथ से नहीं जाने देंगे निगम की जमीन
मामले की जांच कराने के लिए कमिश्नर और नगर आयुक्त को पत्र लिखा है। नगर निगम की जमीन को यूं ही हाथ से नहीं जाने देंगे। जब तक इस मामले की नए सिरे से जांच न हो जाए तब तक मौके पर निर्माण बंद रहना चाहिए। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी होनी चाहिए।
- डॉ सत्या पाण्डेय, मेयर

निगम ने लुटाई और भी जमीन
बिल्डर की जमीन से हुई अदला बदली के अलावा कुछ और भी जमीन पर तिकड़म हुआ है। आराजी संख्या 176 के उत्तर, 177 के पश्चिम, 178 के दक्षिण और अराजी संख्या 155 और 161 के पूरब जमीन एक बड़ा टुकड़ा ऐसा भी है जिसपर सरकारी दस्तावेजों में किसी का नाम ही नहीं दर्ज है। नियम के मुताबिक ऐसी जमीन सरकार की संपत्ति होती है लेकिन उसे अपने नाम नहीं किया गया और वहां भी निर्माण कार्य शुरू हो गया। सूत्रों के अनुसार योजना के तहत इस जमीन को भी अदला-बदली करने वाले बिल्डर को सौंप दिया गया।
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