हड़ताल की वजह से नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन रुका

Gorakhpur Updated Thu, 21 Nov 2013 05:40 AM IST
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गोरखपुर। आरटीओ कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने से विभाग में काम एकदम ठप हो गया है। नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन से लेकर ट्रकों के नेशनल परमिट जारी नहीं हो रहे हैं। इसका सीधा असर ट्रक मालिक और वाहन स्वामियों पर पड़ रहा है। एजेंसी मालिक, गाड़ी मालिक और आरटीओ की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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नियम के मुताबिक अगर एक सप्ताह के अंदर नई गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नहीं होता तो एक सप्ताह बाद हर महीने रजिस्ट्रेशन फीस का पांच प्रतिशत जुर्माना देय है। इधर आलम यह है कि आरटीओ में नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की फाइलें पहुंची पर कर्मचारियों के हड़ताल पर होने की वजह से उनका पंजीकरण नहीं हुआ है। इसका अंजाम यह है कि नई गाड़ियां सड़कों पर नहीं निकल पा रही हैं।
0 रजिस्ट्रेशन के क्या हैं नियम
नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन एजेंसी मालिक ही करा सकता है। नियम के मुताबिक जब तक गाड़ी का नंबर जारी नहीं हो जाता वाहन स्वामी गाड़ी को सड़क पर नहीं चला सकता है। अस्थाई रजिस्ट्रेशन की दशा में एक महीने के अंदर वाहन स्वामी को रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य होता है।

कैसे लगता है जुर्माना
नई गाड़ी जिस तारीख को खरीदी गई है उस तारीख से सात दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन करवाने पर वाहन मूल्य का सात प्रतिशत फीस आरटीओ में जमा होती है। सात दिन बाद रजिस्ट्रेशन पर सात प्रतिशत फीस व पांच प्रतिशत जुर्माना देय है।
0 क्रेता कर रहे ऐतराज
60 से 70 फाइलें आरटीओ में रजिस्ट्रेशन के लिए पड़ी है। लेकिन हड़ताल के चलते नई गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है। वाहन स्वामी ने रजिस्ट्रेशन फीस दे दी है। जुर्माना के रुपये मांगने पर वाहन स्वामी एतराज जता रहे हैं।
अभिषेक सिंह बिट्टू, कालिंदी मोटर्स

सरकार चाहे तो माफ करे
एक सप्ताह बाद गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन होने पर जुर्माना लेने का नियम है। हड़ताल के बाद यह समस्या सामने आने वाली है। नियम के अनुसार जुर्माना लिया जाएगा। सरकार चाहे तो जुर्माना राशि माफ कर सकती है।
एम अंसारी, आरटीओ


एजेंसी मालिक के खिलाफ कर सकते है अपील
एक सप्ताह में गाड़ी का रजिस्ट्रेशन की जिम्मेदारी एजेंसी मालिक की होती है। वाहन खरीदने के बाद एजेंसी मालिक वाहन की कीमत की रसीद जिस पर उस दिन की तारीख लिखी होती है वाहन स्वामी को देते है। रजिस्ट्रेशन फीस देने के बाद अगर वाहन स्वामी से जुर्माने के रूप में अतिरिक्त रुपये मांगे जाते है तो वह एजेंसी मालिक के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में अपील कर सकता है।
आशुतोष कुमार श्रीवास्तव, अधिवक्ता



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