अनशनरत छात्र की हालत बिगड़ी, अस्पताल भेजा गया

Gorakhpur Updated Sun, 27 Oct 2013 05:39 AM IST
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गोरखपुर। पुनर्मूल्यांकन की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे छात्रों में से एक संदीप पांडेय की तबीयत शनिवार शाम बिगड़ गई। छात्रों द्वारा फोन से इसकी सूचना देने पर जिला अस्पताल से एंबुलेंस आई और संदीप को सदर अस्पताल पहुंचाया गया जहां उसे चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। उसका रक्त चाप कम हो गया था। साथ ही शरीर में मिनरल पदार्थ भी कम हो गए हैं। इनकी पूर्ति के लिए ड्रिप लगाया गया है।
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इससे पहले दिन में भी ड. एसपी सिंह के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम अनशन स्थल पर पहुंची थी और अनशनरत छात्रों का परीक्षण किया। सभी के स्वास्थ्य में गिरावट आई है। विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो.एमएन त्रिवेदी, कुलसचिव शैलेश शुक्ल, कला संकाय के अधिष्ठाता सुरेंद्र दुबे अनशन स्थल पर गए और विद्यार्थियों से अनशन और धरना समाप्त करने का आग्रह किया। बताया कि जांच की प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रक्रिया लंबी है लिहाजा समय लगेगा, उन्होंने 15 दिन की मोहलत मांगी। इस पर विद्यार्थियों ने उनके आग्रह को नकार दिया। कहा कि नतीजा सामने आने तक अनशन, धरना जारी रहेगा। इस बीच शनिवार को सेंट एंड्र्यूज कॉलेज के अनूप गुप्त और हसमुद्दीन तथा डीवीएन पीजी के कृष्ण मोहन शाही भी आमरण अनशन पर बैठ गए। इस तरह अब छह छात्र अनशन पर हैं।
उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटनी शुरू
इस बीच जिला प्रशासन और कुलपति प्रो.पीसी त्रिवेदी के विदेश से दिए गए निर्देश पर बनी कमेटी ने शनिवार से जांच प्रक्रिया शुरू कर दी। कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. सुरेंद्र दुबे के संयोजकत्व वाली इस टीम ने सुबह 10.30 से शाम चार बजे तक टीम के सदस्यों भूलोग विभाग के अध्यक्ष प्रो.पीआर चौहान, प्राणि विज्ञान के अध्यक्ष प्रो. वीबी उपाध्याय तथा विश्वविद्यालय और मदन मोहन मालवीय पीजी कॉलेज भाटपार रानी के भूगोल शिक्षकों ने भूगोल विषय की कापियों को देखना शुरू किया। जांच कमेटी के सदस्यों के मुताबिक कोशिश है कि चार दिन में कापियों को देख लिया जाए। जांच में देखा जा रहा है कि कहीं किसी प्रश्न का उत्तर मूूल्यांकन से छूट तो नहीं गया है, किसी सवाल क ा नंबर चढ़ने से तो नहीं रह गया है। इसके अलावा परीक्षकों द्वारा तैयार प्राप्तांक सूची और रिजल्ट तैयार करने वाली एजेंसी के नंबरों में कोई अंतर तो नहीं है। यह कार्य पूरा होने के बाद विषय विशेषज्ञ देखेंगे कि परीक्षकों ने मूल्यांकन में लापरवाही तो नहीं बरती है। कोशिश है कि चार दिन में रिपोर्ट तैयार कर परीक्षा समिति के हवाले कर दिया जाए। परीक्षा समिति के बाद कार्यसमिति इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेगी।
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