हर प्रांत की संस्कृति की दिखी झलक

Gorakhpur Updated Fri, 25 Oct 2013 05:39 AM IST
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गोरखपुर। रेलवे स्टेडियम में चल रहे राष्ट्रीय एकता शिविर के दूसरे दिन कैंप फायर में एक मंच पर पूरे देश की अलग-अलग संस्कृतियों का समागम देखने को मिला। प्रतिभागियों द्वारा अपने देश की पारंपरिक लोकनृत्य और लोकगीतों की प्रस्तुति को खूब सराहा गया। वहीं आठ राज्यों के प्रतिनिधियों ने वैवाहिक रस्मों की झलकियां प्रस्तुत कर अपने प्रदेश की संस्कृति और सभ्यता को साझा किया। इसके अलावा वाद-विवाद, वाद्य यंत्र प्रतियोगिता भी आयोजित की गई।
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बृहस्पतिवार की शाम को कैंप फायर में झारखंड द्वारा संधाली लोकनृत्य ‘फूलों का त्योहार’, मध्य प्रदेश की टीम द्वारा शिवरात्रि पर होने वाला लोकनृत्य ‘नंदी ता मजा इमा गा येता भोले बाबा गा’, महाराष्ट्र द्वारा गोधल लोकगीत ‘अंबा बाई आली आली हो गोधला’ की प्रस्तुति कर पूरे परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल पैदा कर दिया। अरुणांचल प्रदेश की प्रतिभागियों ने लोकनृत्य ‘वांचो ट्रिफ डिस्टक’, असम की टीम ने ‘मछुआरा गीत घूमंट मेघा बई बरखा ’, छत्तीसगढ़ की टीम ने ‘मोहरिया दादारे’, हरियाणा की टीम ने ‘दम-दम करती चालै सै तनै गाल बिठादी म्हार’, पंजाब द्वारा लोकनृत्य भांगड़ा और गिद्दा ‘रंग ला पंजाब तथा पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा लोकगीत चईता ‘बहेला बसन्ती बयरिया हो रामा’ की बेहतरीन प्रस्तुति की। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पुद्दुचेरी, जम्मू काश्मीर, कर्नाटका, केंद्रीय विद्यालय संगठन, मिजोरम, एनएफ रेलवे के प्रतिभागियों ने भी अपने यहां के लोकनृत्य प्रस्तुत किए। त्योहार के ऐतिहासिक महत्व को झलकियों में दिखाया
गोरखपुर। एक मंच पर आठ प्रदेशों के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत की गई प्रमुख त्योहार की झलकियां देख लोगों की उत्सुकता बढ़ गई। वाकई इस अद्भुत नजारे का हर कोई कायल हो गया। अवसर था भारतीय त्योहार प्रतियोगिता का।
अरुणांचल प्रदेश ने प्रति वर्ष 16 फरवरी को मनाए जाने वाले ओड़िया पर्व पर बन्चों साग की प्रस्तुति की। असम की टीम ने तीन बीहू में से एक बीहू जो आश्विन और कटिक संक्रांति में मनाया जाता है, प्रस्तुति किया। इसमें तुलसी की पूजा की जाती हैं। बिहार के लोगों ने छठ पूजा को प्रतीकात्मक रूप से मनाकर दिखाया। छत्तीसगढ़ के प्रतिभागियों ने बस्तर का मशहूर दशहरा पर अपनी प्रस्तुति की। वहां दशहरा 72 दिन तक चलता है। इसकी मुख्य विशेषता है कि इस पर्व पर रावण का वध नहीं किया जाता है। हरियाणा के प्रतिभागियों ने एक महीने तक चलने वाले होली हरियाणा की प्रस्तुति की, इसमें रस्सी और लट्ठ के माध्यम से होली खेली जाती हैं। जम्मू एवं काश्मीर की टीम ने नवरात्रि पर्व की प्रस्तुति की और माता वैष्णो देवी की पूजा करके दिखाया। झारखंड राज्य द्वारा सेहराय पर्व को दिखाया गया जिसे फसल काटने के बाद मनाया जाता है। कर्नाटक द्वारा नाडू हब्बा दशहरा की प्रस्तुति की गयी, इसमें नौ दिन उपवास रखकर घरों में दीप जलाते हैं।
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