रेसिपी और घरेलू नुस्खे के साथ मुन्नू फिर शिवानी

Gorakhpur Updated Tue, 22 Oct 2013 05:39 AM IST
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गोरखपुर। पुस्तक मेला में पहुंच रहीं महिलायें रेसिपी और घरेलू नुस्खों की किताबों के साथ हिंदी साहित्य में मुन्नू भंडारी और गौरा पंत शिवानी को प्राथमिकता पर रखते देखी जा रहीं हैं। तीन दिन के अनुभव के आधार पर पुस्तक विक्रेता भी इसकी तस्दीक कर रहे हैं। सोमवार तक ‘तीन निगाहों की एक तस्वीर’ और ‘करिए छिमा’ महिलाओं द्वारा सबसे अधिक खरीदी गईं। मेला में पहुंच रहे पाठकों के बीच महिलाओं की भी भागीदारी खासी है। सामान्य रुचि वाली महिलाएं रसोई में दक्ष होने की पुस्तकों के साथ दादी-नानी के घरेलू नुस्खों को पसंद कर रही हैं। साहित्य में उनकी पसंद मुन्नू भंडारी और शिवानी बनी हैं। राधाकृष्ण प्रकाशन के विनोद तिवारी के अनुसार शिवानी की कहानियों का संग्रह ‘दो सखियां’ की 15 प्रतियां बिक चुकी हैं। वहीं प्रभात प्रकाशन के कल्पनाथ बताते हैं कि घर में प्रयुक्त होने वाली जानकारियों की पुस्तकें भी पसंद कर रहीं हैं। राजपाल प्रकाशन के स्टाल के अशोक शुक्ला ने बताया कि नासिरा शर्मा, शिवानी, मृदुला गर्ग जैसी 25 लेखिकाओं का कथा संग्रह ‘मेरी प्रिय कहानियां’ महिलाओं में सबसे अधिक पसंद की जा रही है। आध्यात्मिक पुस्तकों की ओर भी आम पाठकों का खासा झुकाव है। डिवाइन पार्क की ओर से विवेकानंद के साहित्यों का स्टाल लगाईं रंजीता ने बताया कि ‘तुम्ही अपने भविष्य के निर्माता’ ‘रिप एक्सीलेंस, रिच सक्सेस’ और ‘डेली थाट, लवली प्लॉट्स’ पुस्तकों की अच्छी मांग है। उधर कमलेश्वर का कितने पाकिस्तान और तस्लीमा नसरीन की लज्जा जैसी विवादास्पद रहीं कृतियां भी पाठकों को खींचने में कामयाब हैं।
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जीवन को राह दिखाती हैं पुस्तकें
पाठकों की संख्या और उनकी रुचि पुस्तक मेला की सार्थकता साबित करने के सफर पर है। बच्चे, युवा या फिर बुजुर्ग, पुस्तकों की दुनिया में सभी की अपनी पसंद हैं। महिलाएं भी इसमें आगे हैं। इनका मानना है कि किताबें जीवन को राह दिखाती हैं। तकनीक चाहे जितनी विकसित हो जाये, पुस्तकों की दुनिया हमेशा आबाद रहेगी। पुस्तकों से जुड़ी इन महिलाओं के अपने अनुभव भी हैं, किताबों के संसार से लिए अनुभव-
‘गोदान’ ने झकझोर दिया
स्नातक अमृता बताती हैं कि पुस्तकें पढ़ने की रुचि उन्हें अपनी मां से मिली। फिर पढ़ना शुरू किया तो लगा हर किसी को पढ़ना चाहिये। प्रेमचंद का ‘गोदान’ पढ़ा, जो अब तक पढ़ी पुस्तकों में सबसे अच्छा लगा। डिश तैयार करने से संबंधित पुस्तक खरीद चुकीं अमृता को किताब मेला में अभी और तलाश थी। बताया-पुस्तकें जीवन भर साथ देती हैं। इनकी सीख ताउम्र काम आती है।
कल्पना शक्ति निखरती है
सीएस का कोर्स कर रहीं अनवी त्रिपाठी खुद के लिये मेला में चेतन भगत की पुस्तकों को तजबीजते मिलीं। हांलाकि उन्हें गिफ्ट करने के लिए शर्लाक होम्स की किताब की तलाश थी। अनवी ने बताया कि उन्हें चेतन भगत की पुस्तकें अधिक भाती हैं। दूसरी किताबें भी पढ़ती हैं। इनके अनुसार किताब से कल्पना शक्ति बढ़ती है। पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं होता।
जीवन एक शिखर ने दी प्रेरणा
निजी स्कूल में शिक्षक शिवांगी के अनुसार पुस्तकों का जीवन में बहुत महत्व है। खाना बनाना भी अच्छा लगता है इसलिए रेसिपी से जुड़ी पुस्तक खरीदी थीं, लेकिन उन्हें जीवन एक शिखर ने बहुत प्रेरणा दिया। शिवांगी बताती हैं कि क्योंकि सीखने के लिये उम्र छोटी होती है और पुस्तकें इसकी बेहतर माध्यम हैं, हर किसी को इसकी आदत डालनी चाहिये।
शिवानी और प्रेमचंद पहली पसंद
घरेलू महिला अर्चना पांडेय को शिवानी और प्रेमचंद सर्वाधिक प्रिय हैं। बच्चों के साथ मेला में आईं अर्चना विज्ञान की पुस्तकें चयन कर रही थीं, लेकिन बताया कि ज्ञान में विविधता लाने के लिये हर तरह की पुस्तकें पढ़नी चाहिए। किताबों के प्रचलन पर किसी भी आशंका को खारिज करते हुये उन्होंने कहा कि किताबों में ज्ञान का खजाना छुपा होता है।
गीत और गजलों की सजी महफिल
बच्चों के बीच रचनात्मक लेखन प्रतियोगिता करने के बाद कार्यक्रमों के लिहाज से मेला का रुख गीत और गजलों की ओर हो गया। लेखक से मिलिए कार्यक्रम के तहत उमेश कुमार पटेल ‘श्रीश’ ने अपनी कविता का पाठ किया। अरुण सदाबहार, लखनऊ से आये अजय मिश्र, डा. सुरेश, अनूप श्रीवास्तव, डा. के के सिंह ‘मयंक’, नवीन शुक्ल, सुजीत श्रीवास्तव, प्राची राज, अमिता दुबे और आर डी श्रीवास्तव ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। इस दौरान कई रंग उभरे और रचनाधर्मिता की विविधता का भी श्रोताओं ने आनंद उठाया।
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