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इंतजामिया से उम्मीद न दुश्वारियों की फिक्र, उमड़ पड़ी आस्था

Gorakhpur Updated Sat, 09 Feb 2013 05:30 AM IST
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गोरखपुर। इसे धर्म के प्रति आस्था कहें या कुछ और। सिर पर गठरी लादे बेतिया के बड़हरा गांव के बालेसर यादव ने जब घर छोड़ा था तो उन्हें न इंतजामिया से कोई उम्मीद थी और न चार सौ मील के लंबे सफर में बुढ़ी हड्डियों पर आने वाली मुसीबतों की फिक्र। सिर्फ एक ही धुन कुंभ के दौरान किसी भी तरह से संगम में डुबकी लगा लें। ऐसा न होता तो शुक्रवार की सुबह आठ बजे रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर उतरते ही यह जानकारी होने कि ‘इलाहाबाद के लिए अगली ट्रेन रात को 10.30 बजे मिलेगी’ उनके चेहरे पर इत्मीनान नहीं झलकता।
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कुछ ऐसा ही सब्र उनके साथ आए गांव के उन दर्जन भर लोगों के चेहरे पर भी दिखाई पड़ा, जो उनके हमउम्र थे। सभी ने धैर्य के साथ यह कहते हुए एक नम्बर प्लेटफार्म पर ही झोला पटक डेरा डाल दिया कि ‘घर छोड़ दिया तो गंगा जी में डुबकी लगाकर ही लौटेंगे, अब चाहे ट्रेन रात को मिले या अगले रोज’। कहते हैं, जहां चाह वहां राह। जिसने उन्हें रात को ट्रेन मिलने की सूचना दी थी वह थोड़ी ही देर बाद उल्टे पांव लौटा और झेपते हुए बालेसर की पूरी टोली को बताया कि रात के अलावा सुबह 10 बजे और फिर दोपहर में एक बजे भी ट्रेन है।

शुक्रवार को पूरे दिन रेलवे स्टेशन का नजारा बदला-बदला नजर आया। ऐसा लग रहा था कि जैसे इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर चले आए हैं, जो न केवल पूरे देश बल्कि विदेशों से आए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ से हांफ रहा हो। ट्रेनों की बोगियां तो दूर शौचालयों के गलियारों में भी ठसा -ठस भीड़। इलाहाबाद की तरफ जाने वाली ट्रेनों के प्लेटफार्म की तरफ आता देख ही श्रद्धालुओं का रेला बोगियों की तरफ दौड़ पड़ रहा था। इस दम घोटू नजारे को देख बच्चे रो रहे थे तो थोड़ी-थोड़ी देर पर भीड़ को चीरते हुए एक आवाज बाहर निकलती ‘पकड़े रहना, छोड़ना नहीं’।
रात 10.30 बजे जाने वाली चौरीचौरा एक्सप्रेस की तो सूरत ही बदल गई थी। बोगियों के भीतर तो भीतर लोगबाग शौचालयों और बोगियों की सीढ़ी पर भी बैठे थे। क्या जनरल, क्या स्लीपर और क्या एसी कहीं पर भी पैर रखने की जगह नहीं बच गई थी। जान हथेली पर रख कोई इमरजेंसी खिड़की से चढ़ रहा तो कोई उसे पीछे से धक्का दे रहा था। लोग एक दूसरे के उपर चढ़कर किसी भी तरह बोगी के अंदर प्रवेश कर जाना चाह रहे थे। अब इसमें किसी को चोट लगे या किसी की जान जाए, अपनी बला से। सैकड़ों की संख्या में लोग इन हालात में सफर करने की हिम्मत नहीं जुटा सके तो वे वापस लौट गए।

पिट से ही भरी हुई आई चौरीचौरा
श्रद्धालुओं की टूट पड़ी भीड़ का फायदा रेलवे के कुछ कर्मचारियों ने भी खूब उठाया। रेलवे सूत्रों के अनुसार आरपीएफ के कुछ जवानों और सफाई कर्मचारियों ने पिट पर ही चौरीचौरा एक्सप्रेस की ज्यादातर जनरल बोगियों की सीटों को पैसा लेकर बेच दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंची तो लोग यह देखकर भड़क उठे कि बोगियां पहले से कैसे भरी हुई हैं। कई बोगियों में तो सीट के लिए जमकर लात घूसे भी चले।

हजारों की भीड़ संभालने को एक भी सिपाही नहीं
स्टेशन पर हजारों की भीड़ और चारो तरफ अफरा-तफरी का माहौल होने के बाद भी चौरीचौरा ट्रेन के समय प्लेटफार्म पर न तो आरपीएफ का एक भी जवान दिखाई पड़ा और न ही जीआरपी। इक्का- दुक्का दिखे भी तो एक किनारे अपने को छुपाने की मुद्रा में। यही वजह है कि प्लेटफार्म से लेकर ट्रेन की कई बोगियों में सीट के लिए मारपीट और गाली-गलौच की नौबत आ गई।

बाद में चलानी पड़ी रद क ी जा चुकी ट्रेन
गोरखपुर। मौनी अमावस्या पर कुंभ स्नान के लिए रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार की रात श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थिति बिगड़ती देख रेल प्रशासन को दोपहर में कुंभ मेले के लिए चलाई जाने वाली विशेष ट्रेन को निरस्त करने के बावजूद उसे देर रात फिर से चलाना पड़ा। दोपहर और रात आठ बजे की स्पेशल ट्रेनों में भी लोग ठसाठस भरे हुए थे। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने गोरखपुर से इलाहाबाद के लिए तीन ट्रेनें संचालित की हैं।
रविवार को मौनी अमावस्या के मद्देनजर सात फरवरी से ये विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इन ट्रेनों को सुबह 10 बजे, दोपहर एक बजे और रात सात बजे से चलाया जा रहा है। नौ फरवरी को सिर्फ एक ट्रेन सुबह 10 बजे चलाई जाएगी।
सुबह के समय स्टेशन के टिकट काउंटरों से रेल प्रशासन की उम्मीदों के अनुरूप टिकटों की बिक्री नहीं हुई जिससे इन ट्रेनों को विलंब से चलाने के अलावा दोपहर एक बजे की ट्रेन को निरस्त कर दिया गया। वहीं सुबह 10 बजे वाली ट्रेन करीब तीन घंटे की देरी से दोपहर एक बजे चलाई गई। स्टेशन प्रबंधक राजन कुमार ने बताया कि शाम को अचानक श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाने पर रेल प्रशासन ने इस निरस्त ट्रेन को दोबारा रात आठ बजे चलाने का फैसला किया।

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