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102 मुख्य आरक्षी देश सेवा को समर्पित

Gorakhpur Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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गोरखपुर। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के तृतीय बैच के 102 नव मुख्य आरक्षी (मंत्रालियक) को शुक्रवार को देश सेवा की शपथ दिलाई गई। एसएसबी प्रशिक्षु प्रशिक्षण केंद्र में मुख्य अतिथि डीआईजी ट्रेनिंग उपेंद्र प्रकाश बलौदी ने जवानों को शपथ दिलाई।
द्वितीय सेनानायक प्रशिक्षु प्रशिक्षण केन्द्र गोरखपुर पीएस सलारिया ने कहा कि 102 नव मुख्य आरक्षी प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं। 24 सप्ताह में जवानों को ड्रिल, अस्त्र्ा-शस्त्र्ा, युद्ध कौशल, मैप रीडिंग, सीमा प्रबंधन आदि में पारंगत किया गया। जवानों को बल अधिनियम, कंप्यूटर ज्ञान, भारतीय संविधान व भारतीय दंड संहिता जैसे विषयों की जानकारी दी गई है।
मुख्य अतिथि डीआईजी ट्रेनिंग उपेंद्र प्रकाश बलौदी परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। निरीक्षण के बाद 102 जवानों ने मार्च पास्ट की सलामी दी। डीआईजी ट्रेनिंग ने एसएसबी प्रेरणा स्मारिका का विमोचन किया। उन्होंने छह नव मुख्य आरक्षियों में अपनी विधा में सर्वश्रेष्ठ होने पर पुरस्कृत किया। सर्वश्रेष्ठ वाह्य क्रियाकलापों के लिए एम चिंगलेन मितई, सर्वश्रेष्ठ आंतरिक क्रिया कलापों के लिए अजय कुमार, सर्वश्रेष्ठ शारीरिक प्रशिक्षण के लिए गौरव कुमार, सर्वश्रेष्ठ निशानेबाजी के लिए राजकुमारी, सर्वश्रेष्ठ ड्रिल एवं टर्न आउट के लिए ज्योति गोसाई तथा सभी विधाओं में सर्वश्रेष्ठ रहने पर पूनम रतूड़ी को पुरस्कृत किया।

एसएसबी आरक्षी परेड का पहली बार महिला ने नेतृत्व किया
गोरखपुर। कड़कड़ाती ठंड, घना कोहरा, चारों ओर अजब की खामोशी। इसी दौरान एक कोने पर देश भक्ति गीत के स्वर गूंजने लगे। गीत के स्वर जब खामोश हुए ठीक उसी वक्त ‘परेड विश्राम’ का कासन फिजा में गूंजने लगा। यह कड़क आवाज थी 102 नव मुख्य आरक्षी (मंत्रालयिक) की नेतृत्वकर्ता एक महिला जवान की।
शुक्रवार की सुबह सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) मुख्यालय में 102 नव मुख्य आरक्षी (मंत्रालिए) का भव्य दीक्षांत परेड देखते ही बनता था। इस परेड की सबसे खास बात यह रही कि एसएसबी के इतिहास में पहली बार 102 जवानों का नेतृत्व किसी महिला जवान ने किया। वह थी देहरादून की पूनम रेतूड़ी। 24 सप्ताह के अपने प्रशिक्षण में हर विधा में सर्वश्रेष्ठ अंक पाते हुए पुरुष को पछाड़ते यह मुकाम हासिल किया था। देहरादून में टैक्सी चालक राम चंदन की बड़ी बेटी पूनम को घर में बेटों की तरह मान सम्मान मिला। तीन बहन और एक भाई में पूनम सबसे बड़ी है। अमर उजाला से बातचीत में पूनम ने बताया कि जागती आंखों से उसने जो सपना देखा था वह आज पूरा हो गया। उसने बताया कि जवानों के नेतृत्व करने की खुशी जो उसे आज मिली है वह उसे शब्दों में बया नहीं कर सकती है। डीआईजी ट्रेनिंग उपेंद्र प्रकाश बलौदी की तारीफ करते हुए पूनम ने बताया कि वह सभी जवानों को अपने बच्चों की तरह स्नेह देते हैं। पूनम ने कहा कि अपने भाई और बहन को भी वह एसएसबी ज्वाइंन करने के लिए प्रेरित करेंगी।

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