मानवाधिकार को कार्य व्यवहार का हिस्सा बनाएं

Gorakhpur Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
गोरखपुर। तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों और तकनीकी प्रगति ने मानवाधिकार की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। इसका प्रभाव समाज से लेकर सरकारों तक पर पड़ रहा है। इन चुनौतियों से निबटने के लिए मानवाधिकार को औपचारिक अनुष्ठान की बजाय दैनिक कार्य व्यवहार और संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा। ये विचार यूनिवर्सिटी के रक्षा विभाग मेें रक्षा अध्ययन परिषद की ओर से आयोजित गोष्ठी में व्यक्त किए गए।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. हरी शरण ने मानवाधिकार पर सरकारों के रवैये की निर्धारक परिस्थितियों का विश्लेषण किया। कहा कि राज्य लोकहित की चिंता के लिए उत्तरदायी है। अत: अपनी रीति-नीति निर्धारित करता है। तमाम अंतरविरोधों के मानवाधिकार विषयक परिस्थितियों में निरंतर सुधार आ रहा है। वरिष्ठ आचार्य प्रो. एपी शुक्ला ने कहा कि राजनीतिक स्वार्थों और वोट बैंक के लिए उठाये जाने वाले कदम बुनियादी तौर पर मानवाधिकार विरोधी हैं।
गोष्ठी को डॉ. हर्ष कुमार सिन्हा, डॉ. बीके सिंह, डॉ. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी आदि ने भी संबोधित किया। इसके अलावा प्रबल जायसवाल, स्वाति राय, शिवम राय, सोनम शाही, वंशीधर पांडेय, मदनमोहन शुक्ल, सत्येंद्र यादव, आशीष कुमार ने शोधपत्र पढ़ा। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार यादव ने आगंतुकों के प्रति आभार जताया, संचालन परिषद के सचिव एवं वरिष्ठ शोध अध्येता अरविंद कुमार पांडेय ने किया।

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