कमिश्नर ने भी माना चौपट हो चुका है ट्रैफिक सिस्टम

Gorakhpur Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। कमिश्नर के. रविन्द्र नायक भी यह मानते हैं कि जिले में ट्रैफिक व्यवस्था चौपट हो चुकी है। यातायात सप्ताह के दौरान ही शहर में जगह-जगह लग रहे जाम से खफा कमिश्नर ने बृहस्पतिवार को डीएम को विभिन्न चौराहों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड की उपस्थिति की रेंडम चेकिंग कराने का निर्देश दिया। कमिश्नर के इस निर्देश पर डीएम ने अपने मातहतों से जांच कराई तो दर्जनों की संख्या में ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड अपने तैनाती स्थल से नदारद मिले।
कमिश्नर का कहना है कि कहने को तो ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए दो सौ होमगार्ड तैनात किए गए हैं लेकिन मौके पर एक भी सही ढंग से अपनी ड्यूटी नहीं निभाते। उन्होंने सीओ ट्रैफिक के प्रति भी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जिले में उनकी तैनाती से उम्मीद जगी थी कि ट्रैफिक लोड कुछ कंट्रोल होगा लेकिन उन्होंने भी निराश किया। कमिश्नर का कहना है कि जिम्मेदार सिर्फ कोरे निर्देश जारी कर रहे हैं जिनका पालन नहीं हो पा रहा है। संसाधन होने के बाद भी जिले की जनता ट्रैफिक की समस्या से त्रस्त है। कोई ऐसा चौराहा नहीं बचा है जहां जाम न लग जाए।
इस संदर्भ में एडीएम सिटी देव कृष्ण तिवारी ने बताया कि जिन चौराहों पर होमगार्ड तैनात किए गए थे वे वहां सक्रिय नहीं थी। जांच में पाया गया कि शहर के क रीब आधा दर्जन प्रमुख चौराहों पर लोग जाम से जूझ रहे थे और होमगार्ड एक किनारे आराम फरमा रहे थे। यही स्थिति कुछ ट्रैफिक पुलिस वालों की भी थी। उन्होंने बताया कि कमांडेंट को पत्र लिखकर कहा गया है कि ट्रैफिक संभालने के लिए उन्हीं होमगार्ड की तैनाती की जाए जो तेज तर्रार हों। इसी तरह सीओ ट्रैफिक को भी चेताया गया है।

ढाई माह में भी वन वे नहीं हो सक ीं तीन सड़कें
ट्रैफिक को लेकर प्रशासन एवं पुलिस विभाग की सुस्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 अगस्त के दो दिन पूर्व जिला प्रशासन ने बैठक कर शहर की भीड़ वाले तीन मार्गों को वन-वे करने का निर्णय लिया था। ढाई माह बीतने को है लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी मार्ग को वन वे नहीं किया जा सका। जिन सड़कों को वन वे किया जाना था उनमें गणेश चौराहे से लेकर विजय चौक, विजय चौक से लेकर बैंक रोड तथा अग्रसेन तिराहे से लेकर बक्शीपुर चौक तक की सड़क शामिल है। जानकारों का मानना है कि अगर इन सड़कों को वन वे कर दिया गया होता तो काफी हद तक ट्रैफिक के लोड को कम किया जा सकता था। उधर, एडीएम सिटी देव कृष्ण तिवारी का कहना है कि अभी तक सर्वे ही किया जा रहा है जबकि बैठक में अगले दिन से ही इन मार्गों को वन वे करने का निर्देश जारी किया गया था।

स्कूलों का समय भी नहीं बदला
एक ही मार्ग पर स्थित दो या उससे अधिक स्कूलों के खुलने-बंद होने के समय में भी आधे से पौन घंटे का अंतर करने का भी प्रशासन का निर्णय लागू न हो सका। यहीं नहीं शहर में बड़े स्कूली वाहनों का संचालन भी नहीं बंद कराया जा सका।

धड़ल्ले से शहर में चल रहे ग्रामीण क्षेत्र के टैंपो
रोक के बावजूद भी शहर में धड़ल्ले से ग्रामीण क्षेत्र के टैंपो चल रहे हैं। शहर में जाम का यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है। तत्कालीन डीआईजी असीम अरुण ने शहर में ग्रामीण क्षेत्रों के टैंपो का प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया था। उनके यहां से तबादला होने के बाद से ही ग्रामीण क्षेत्र के टैंपो शहर में प्रवेश करने लगे। करीब एक माह पूर्व ट्रैफिक और प्रशासनिक महकमे ने तो थोड़ी सख्ती दिखाई तो कुछ दिनों तक ग्रामीण क्षेत्र के टैंपो शहर में प्रवेश नहीं कर सके लेकिन अब फिर धड़ल्ले से इनका संचालन शुरू हो गया।

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