इंसेफेलाइटिस के नए वायरस की पड़ताल शुरू

Gorakhpur Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित विषाणु विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक इन दिनों इंसेफेलाइटिस के नए विषाणु की पड़ताल में जुटे हैं। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में सितंबर से नवंबर तक आए मरीजों के सैंपल को लेकर जांच की जा रही है।
यह कहना है संस्थान के निदेशक डॉ. मिलिंद गोरे का। डॉ. गोरे ने बताया कि वर्ष 2008 के पहले तक तो पता ही नहीं था कि इंसेफेलाइटिस रोग है क्या। इसके लिए संबंधित रोगियों के रक्त नमूनों के सैंपल की जांच के बाद पता चला कि इंसेफेलाइटस का कारक जेई और एंट्रो वाइरस है। इसका पता चलने के बाद इसकी रोकथाम और इलाज पर काम शुरू हुआ। अब इस साल सितंबर से नवंबर तक इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में आए मरीजों के रक्त नमूनों को एकत्र कर नए वायरस की खोज की जा रही है। यह जानने का प्रयास हो रहा है कि जेई और एंट्रो वायरस के अलावा भी इंसेफेलाइटिस का कारक कोई और वायरस तो नहीं है।
उन्होंने बताया कि वैसे तो रैबीज, तपेदिक और खसरा के विषाणुओं के दिमाग में प्रवेश कर जाने के बाद रोग का लक्षण इंसेफेलाइटिस की तरह ही होता है। संस्थान का काम महामारी की दृष्टि से वायरस की पहचान करना है, ताकि उस पर समय रहते नियंत्रण किया जा सके।

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