वैश्वीकरण ने तेज की विस्‍थापन प्रक्रिया

Gorakhpur Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। वैश्वीकरण से माइग्रेशन प्रक्रिया में तेजी आई है। यहां तक कि कल तो जो ग्रामीण अपनी मिट्टी से अलग नहीं होना चाहते थे वे भी इससे प्रभावित हो कर औद्योगिक क्षेत्रों की ओर रुखसत करने लगे हैं। यह कहना है समाजशास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो.जीबी सहाय का। वह यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र विभाग की ओर से आयोजित ‘माइग्रेशन, डेवलपमेंट एंड जेंडर इन इंडिया: इश्यूसज एंड कनसर्न’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र के विशिष्ट अतिथि प्रो. सहाय का कहना था कि माइग्रेशन पर समाजशास्त्रीय नजरिये से विचार करना जरूरी है। अर्थशास्त्र में तो माइग्रेन की चर्चा होती है, लेकिन वह इसका समायोजन नहीं कर सकता। विकासशील समाज की अपनी समस्या होती है। भारतीय परिप्रेक्ष्य के आधार पर ही हम माइग्रेशन से संबंधित भ्रांतियों को दूर कर सकते हैं। मुख्य अतिथि तेजपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रो. चंद्रशेखर ने कहा कि वैश्वीकरण ने लोगों की गतिशीलता को बढ़ाया है। साथ ही माइग्रेशन की प्रवृत्ति भी तेज की है। नई अर्थव्यवस्था आने के बाद भौगोलिक आधार पर होने वाली जनसंख्यात्मक गतिशीलता के स्थान पर सामाजिक कारकों की भूमिका बढ़ रही है। विकास के लिए माइग्रेशन आवश्यक पक्ष है। इससे व्यक्ति एक स्थानीय क्षेत्र से नए क्षेत्र में अथवा दूसरे राष्ट्रों तक जा रहे हैं। वहां आर्थिक अवसरों की पर्याप्त उपलब्धता होती। माइग्रेशन अवसर पैदा करता है। लेकिन माइग्रेशन ने नई समस्या भी पैदा की है। माइग्रेशन में व्यक्तिगत क्षमता भी महत्वपूर्ण है। व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर ही अच्छे अवसरों को भुनाया जा सकता है। माइग्रेशन विकास में भी सहायक है। संगोष्ठी के अध्यक्ष कुलपति प्रो.पीसी त्रिवेदी ने माइग्रेशन को नैसर्गिक प्रवृत्ति बताया। कहा कि माइग्रेट हो कर ही अपना स्तर बढ़ाया जा सकता है। संगोष्ठी के प्रथम सत्र के आयोजन सचिव डॉ. अनुराग द्विवेदी ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। संचालन मनीष पांडेय ने किया।
द्वितीय सत्र में उत्तर प्रदेश में विकास: चुनौतियां एवं समस्याएं विषय पर पैनल डिस्कशन में न्यायिक अधिकारी अरविंद मिश्र ने कहा कि न्याय एक अनुभूति है जो समाज को संतुष्ट करती है, तभी विकास होता है। मंडलायुक्त के. रविंद्र नायक ने कहा कि जोतों की घटती संख्या और परिवार की बढ़ती संख्या ने सामाजिक संरचना को प्रभावित किया है। इससे माइग्रेशन बढ़ा है। डीआईजी मुथा अशोक जैन ने कहा कि महिलाओं में गतिशीलता बढ़ने के बावजूद उन्हें स्वतंत्रता एवं समानता नहीं मिल सकी है।
संगोष्ठी को अध्यक्ष समाज शास्त्र प्रो.ए सत्यनारायण, प्रो.प्रभा शंकर पांडेय ने भी संबोधित किया। इस मौके पर डॉ. अनुराग द्विवेदी की दो पुस्तकों समाज शास्त्र: एक व्यवस्थित अध्ययन एवं पर्यावरण एवं समाज का विमोचन भी हुआ। इस अवसर पर आयोजक प्रो. कीर्ति पांडेय, डॉ. संगीता पांडेय, डॉ. शुभि धूसिया, डॉ. अंजू मौजूद थीं। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ।

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