अब सेटिंग पर नहीं मिलेगी पीएचडी डिग्री

Gorakhpur Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। यूनिवर्सिटी में पीएचडी डिग्री पाना अब आसान नहीं रहा। थीसिस जमा होने के बाद होने वाले शोधार्थी के अंतिम साक्षात्कार में सेटिंग-गेटिंग नहीं चलेगी। हर विभाग के प्रत्येक पीएचडी साक्षात्कार में खुद कुलपति भी मौजूद रहेंगे। इसकी पहल उन्होंने गुरुवार को आधुनिक एवं मुगलकालीन इतिहास विभाग से की।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी में कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने गुरुवार को नई परंपरा शुरू की। सुबह साढ़े दस बजे के करीब कुलपति पहुंच गए आधुनिक एवं मुगलकालीन इतिहास विभाग में। वहां आज विभागाध्यक्ष प्रो. सैयद एनआर रिजवी के निर्देश में ‘पूर्वी उत्तर प्रदेश में1857 का विद्रोह ’ विषयक शोध करने वाले गोपेश त्रिपाठी का अंतिम साक्षात्कार था। इसके लिए मिथिला यूनीवसिटी दरभंगा के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रत्नेश्वर मिश्र को आमंत्रित किया गया था। कुलपति क ी मौजूदगी में साक्षात्कार शुरू हुआ। उसके बाद वीसी ने प्रो. मिश्र से विद्यार्थियों के समक्ष व्याख्यान देने का प्रस्ताव रखा। इस पर एमए और पीएचडी के विद्यार्थियों के समक्ष प्रो. मिश्र ने नारीवाद पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि अब तक हम समाज और धर्म सुधारकों के नजरिए से ही नारी को देखते हैं। उसका आंकलन करते हैं और पूजते हैं। यही दृष्टि इतिहास लेखन में भी रही है। लेकिन समाज सुधारक हों या धर्म सुधारक इनका नजरिया नारीवाद के एक पक्ष को ही उजागर करता है। बताया कि भारत ही एक मात्र देश है जहां संविधान के लागू होते ही स्त्री-पुरुष को समान अधिकार दिया गया। लेकिन सिर्फ अधिकार देने से ही सब कुछ हासिल नहीं हो जाता, इसके लिए खुद आगे आना होता है।
इस नई परंपरा के बाबत वीसी ने बताया कि शोध की गुणवत्ता को परखने के लिहाज से यह पहल की गई है। ताकि यूनिवर्सिटी से जो शोध करे उसमें संबंधित विषय में संपूर्ण दक्षता हासिल हो। साथ ही यह भी देखना है कि कहीं सेटिंग-गेटिंग से तो पीएचडी उपाधि नहीं दी जा रही। इसके लिए बाकायदा हर विभाग में एक रजिस्टर होगा जिसमें सारी कार्रवाई दर्ज होगी।
रेवड़ी की तरह नहीं बंटेगी डीएससी उपाधि

यूनिवर्सिटी ने रजिस्ट्रेशन के मानक सख्त किए
गोरखपुर। अब यूनिवर्सिटी से डीएससी की उपाधि पाना आसान नहीं होगा। उपाधि तो दूर इसके लिए हर किसी का रजिस्ट्रेशन भी नहीं हो पाएगा। यूनिवर्सिटी ने रजिस्ट्रेशन मानक काफी कठोर कर दिया है। डीलिट के नए मानक पर 26 नवंबर को प्रस्तावित एकेडमिक काउंसिल की बैठक में चर्चा होगी।
डीएससी और डीलिट में रजिस्ट्रेशन के लिए नई नियमावली तैयार हो गई है। इसके तहत डीलिट के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले के लिए जरूरी होगा कि इससे पूर्व संबंधित शोधार्थी के कम से कम छह रिसर्च वर्क प्रकाशित हो चुके हों। रजिस्ट्रेशन से पहले ही तीन बाहरी एक्सपर्ट डीएससी और डीलिट उपाधि के सिनास्पसिस को जाचेंगे। संबंधित शोधार्थी का साक्षात्कार होगा। शोध विषय के प्रति शोधार्थी कितना जागरूक है यह जानने की भी कोशिश होगी। विशेषज्ञों की संतुष्टि के बाद ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आरंभ होगी। इसकी पुष्टि गुरुवार को कुलपति प्रो.पीसी त्रिवेदी ने की। बताया कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी को विशिष्ट शोध केंद्र के रूप में विकसित करना उनकी प्राथमिकता है।

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