एमएससी इलेक्ट्रिकल में की जाएं 30 सीटें

Gorakhpur Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। यूनिवर्सिटी के एमएससी इलेक्ट्रिकल के पहले एल्युमिनाई मीट ‘समन्वय’ में इस कोर्स के विद्यार्थियों के एमटेक में दाखिले का मसला उठा। कुछ एल्युमिनाई ने नौकरी मिलने में आ रही दिक्कतों का भी मसला उठाया। विद्यार्थियों का कहना था कि यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रिकल कोर्स में भले मास्टर डिग्री की सुविधा बहाल हो गई हो पर डिग्री पाने के बाद एमटेक में प्रवेश में दिक्कत आ रही है। बेहतर इंटरव्यू होने के बाद भी इंजीनियरिंग कॉलेज के लोग प्रवेश लेने से इंकार कर दे रहे हैं। इसी तरह विभिन्न फैक्ट्रियों में नौकरी देने के नाम भी लोग पीछे हट जा रहे हैं। मांग की गई कि एमसएमसी इलेक्ट्रिकल में पहले की तरह 30 सीटें की जाएं, जो इस समय 15 हैं
होटल क्लार्क में आयोजित एल्युमिनाई मीट के अंतिम सत्र में हुए पैनल डिस्कशन में ये बातें उठीं। एल्युमिनी का कहना था कि एजूकेशन लोन लेते वक्त बैंक भी एआईसीटी की मान्यता का प्रमाण पत्र मांगते हैं। इन मुद्दों पर विशेषज्ञों की राय थी कि यूजीसी के दिशा निर्देश को दूसरी सभी संस्थाओं को मानने के लिए विवश करने की व्यवस्था होनी चाहिए। इस पर कुलपति प्रो. पीसी त्रिवेदी ने कहा कि वह इस मसले को मई में गोरखपुर में प्रस्तावित अखिल भारतीय कुलपति सम्मेलन में उठाएंगे। साथ ही यूजीसी, एआईसीटीसी के साथ जहां कहीं भी जरूरत होगी इसके लिए वार्ता की जाएगी। केंद्र और राज्य सरकार से भी वार्ता का आश्वासन कुलपति ने दिया।
इस मौके पर पूर्व कुलपति प्रो.राधे मोहन मिश्र और तत्कालीन संकायाध्यक्ष प्रो.महेश्वर मिश्र का तर्क था कि बेसिक साइंस के बगैर टेक्निकल एजूकेशन पूर्ण नहीं है। इन दोनों ने इंटीग्रेटेड कोर्स की वकालत भी की। प्रो. राजेंद्र का सुझाव था कि यूनिवर्सिटी में संचालित इलेक्ट्रिकल पाठ्यक्रम में कुछ बडे़ विशेषज्ञों के व्याख्यान कराया चाहिए, इसमें विभिन्न कॉलेजों और फैक्ट्रियों के लोगों को भी शामिल किया जाए। ऐसा होने पर वे यूनिवर्सिटी के पाठ्यक्रम को समझ सकेंगे। तब ऐसी दिक्कत नहीं आएगी। इस पर एल्युमिनाईज ने आश्वस्त किया कि वे अपने स्तर से अतिथि विद्वान आमंत्रित करेंगे। पूर्व कुलपति ने कहा कि स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम एजूकेशन के क्षेत्र में लांछन जैसे हैं। उन्होंने सलाह दी कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ऐसे कई ट्रेड हैं जिन पर अभी से ध्यान देने की जरूरत है अन्यथा समय निकल जाएगा तो भावी पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। कुलपति प्रो.त्रिवेदी ने उच्च शिक्षा की उत्कृष्टता पर जोर दिया। कहा कि यूनिवर्सिटी को शोध का केंद्र बनना चाहिए। बताया कि नए विभागों के लिए तीन सौ करोड़ का बजट भेजा गया है।
इस मौके पर सेंट्रल इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक जय गोपाल पांडेय, निशांत सिंह, आईआईटी राजस्थान के प्रो. श्री प्रकाश तिवारी, यूनिवर्सिटी के इलेक्ट्रिकल संकाय के अध्यक्ष प्रो.मनीष मिश्र आदि ने विचार रखे। पूर्व कुलपति प्रो. मिश्र, पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. मिश्र तथा प्रो. राजेंद्र का सम्मान भी किया गया।

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