रजिस्ट्री के दो साल बाद भी नहीं मिला कब्जा

Gorakhpur Updated Wed, 07 Nov 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। मुआवजा विवाद के चलते जीडीए की राप्ती नगर विस्तार आवासीय योजना व सेटेलाइट टाउनशिप पर ग्रहण लगता दिख रहा है। विवाद के चलते सेटेलाइट टाउनशिप का पंजीकरण नहीं शुरू हो पाया। राप्ती नगर विस्तार आवासीय योजना के सभी भूखंड बिकने के दो साल बाद भी जीडीए आवंटियों को कब्जा नहीं दे पाया है।
जीडीए ने मेडिकल कालेज क्षेत्र के पांच गांवों की भूमि का अधिग्रहण कर वर्ष 2008 में दोनों योजनाओं को लांच किया था। निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही किसानों ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर योजनाओं का विरोध शुरू कर दिया। इसके चलते सेटेलाइट टाउनशिप का काम शुरू नहीं हुआ लेकिन राप्ती नगर विस्तार में जीडीए ने काम शुरू करा दिया। 2009-10 में पंजीकरण शुरू हुआ और योजना के सभी 951 भूखंड बिक गए। तीन सौ आवंटियों ने भूखंडों की रजिस्ट्री भी करवा ली। रजिस्ट्री के बाद जीडीए के अफसरों ने योजना की तरफ से मुंह मोड़ लिया और चार साल बाद भी इसमें कोई काम नहीं हो पाया। अफसर अब यह कह रहे हैं कि यदि किसी को जल्दी है तो वह अपना रुपया वापस ले सकता है।

भूखंड नहीं दिया, अब पैसा काट रहे
राप्ती नगर विस्तार में एलआईजी का भूखंड लेने वाले सत्यम मिश्रा बताते हैं कि दो साल पहले उन्होंने लोन लेकर भूखंड लिया, लेकिन कब्जा नहीं मिला। जीडीए अफसरों से संपर्क करने पर बताया गया कि भूखंड के ऊपर से हाईटेंशन तार गुजर रहा है। पैसा वापस मांगने पर अफसरों ने कहा कि यदि भूखंड वापस करना चाहते हैं तो दंड शुल्क लगेगा। सत्यम मिश्रा अफसरों का चक्कर लगाकर पूछ रहे हैं कि उन्हें भूखंड मिला ही कहां जो वापस करने का शुल्क काटा जा रहा है।

जमीन बिक गई, भूखंड भी नहीं मिला
संतकबीर नगर के रहने वाले जितेन्द्र जायसवाल ने गांव का खेत बेचकर राप्ती नगर विस्तार में भूखंड लिया था। गोरखपुर में छोटा व्यवसाय करने वाले जितेन्द्र को उम्मीद थी कि साल भर के भीतर मकान बन जाएगा और हर माह पांच हजार रुपये किराया बचेगा। गांव की जमीन बिक गई और हर माह किराया भी देना पड़ रहा है। जितेन्द्र कहते हैं कि जीडीए अफसरों को विवाद सुलझाने के बाद योजना लांच करना चाहिए था।

रुपये वापस ले सकते हैं आवंटी : जीडीए वीसी (वीसी की पीपी फोटो)
जीडीए वीसी सर्वेश चन्द मिश्र ने कहा कि दोनों योजनाओं में काम शुरू होने में दिक्कतें आ रही हैं। सभी पक्षों से बात की जा रही है। लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि बात नहीं बनी तो सभी का पैसा वापस कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई आवंटी अपना रुपया वापस लेना चाहता है तो जीडीए उसके लिए भी तैयार है।

किस कटेगरी के कितने भूखंड
एचआईजी प्रथम 12
एचआईजी द्वितीय 144
एमआईजी 288
एलआईजी 199
ईडब्ल्यूएस 308

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