कल्याण के लिए उपयोगी है गीता

Gorakhpur Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकली भगवत गीता मानव जाति के कल्याण के लिए उपयोगी है। मोह भंग के लिए इसे अमृत तुल्य माना गया है। उन्होंने कहा कि युद्ध के मैदान में अर्जुन के मोह भंग के उद्देश्य से ही कृष्ण ने गीता उपदेश दिया था।
गीता वाटिका में गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन एस्कॉन के प्रचारक, कथा व्यास अक्रूर दास ने ये बातें कहीं। कहा कि गीता के माध्यम से व्यक्ति का जीवन सुधरने लगता है। इसमें कुल 18 अध्याय, 700 श्लोक हैं। हर अध्याय एक एक योग को समर्पित है। हरि के श्रीमुख से निकली गीता से कर्म ज्ञान व भक्ति ज्ञान की त्रिविधि गंगा प्रवाहित हो रही है। भक्ति योग ईश्वर प्राप्ति का सरलतम मार्ग है। इससे पूर्व हनुमान मंदिर से प्रभु अक्रूर दास के नेतृत्व में संकीर्तन यात्रा निकाली गई।
बुधवार को गीता वाटिका में दिव्य 56 भोग का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। श्रद्धालुओं की तरफ से इसे राधा कृष्ण को समर्पित किया जाएगा। अमेरिका, कनाडा, रूस सहित कई देशों से आए श्रद्धालुओं की तरफ से हरिनाम संकीर्तन किया गया।

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