घटिया ईंटों से बन रहा है चिड़ियाघर

Gorakhpur Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। शहर में बन रहे चिड़ियाघर के निर्माण की शुरुआत पर ही उंगलियां उठने लगीं हैं। निर्माण में मानकों की धज्जियां उड़ाई जाने लगीं तो इसकी शिकायत शासन स्तर पर की गई। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच की जिम्मेदारी वन संरक्षक बस्ती को सौंप दी। जो जांच रिपोर्ट आई उसमें कई अनियमितताएं पाई गईं। इसे गंभीर मानते हुए तत्कालीन प्रमुख वन संरक्षक ने जिले के डीएफओ से कार्रवाई कर उन्हें सूचित करने को कहा।
बता दें कि बसपा सरकार के कार्यकाल में जिले में चिड़ियाघर की स्वीकृति मिली थी। 112 एकड़ के क्षेत्रफल में बनने वाले चिड़ियाघर के लिए सौ करोड़ रुपये की मंजूरी भी मिली थी। इसका शिलान्यास होते ही घोटालों और अनियमितताओं के आरोप लगने शुरू हो गए। चर्चाओं के मुताबिक शिलान्यास के समय 93 लाख रुपये का खर्च दिखाया गया। निर्माण के लिए प्रथम किश्त के रूप में लगभग 10 करोड़ रुपया आया। जब उसका कार्य शुरू होने लगा तो फर्म की कार्यप्रणाली और विभाग के स्थानीय उच्चाधिकारियों पर उंगलियां उठने लगीं। बात जब लखनऊ तक पहुंची तो प्रमुख वन संरक्षक बी.के. पटनायक ने पूरे मामले की जांच बस्ती के बन संरक्षक महेंद्र सिंह को सौंपी। महेंद्र सिंह की जो रिपोर्ट आई वह चौंकाने वाली थी।
वन संरक्षक बस्ती महेंद्र सिंह ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि तकनीकी कार्यों को देखने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। पर जो कार्यप्रणाली कार्यदायी संस्था और स्थानीय अधिकारियों की है उसमें अब उनका कोई औचित्य नहीं रह गया है। भविष्य में यदि चिड़ियाघर में अनियमितता पाई गई जाती है तो उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। जांच रिपोर्ट में लिखा कि पायलिंग के कार्य में आरसीसी डाली जा रही थी, जो ठीक नहीं थी। आरसीसी में नौतनवां की गिट्टी इस्तेमाल की जा रही है। कार्यदायी संस्था ने जो इकरारनामा किया है उन शर्तों का वह पालन नहीं कर रही है। कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता सही नहीं थी। ईंट से लेकर हर सामग्री घटिया स्तर की प्रयोग हो रही थी।



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अभी वन राज्यमंत्री डॉ. शिव प्रताप यादव जिले के दौरे पर आए थे। उन्होंने इसका निरीक्षण किया था। उनके निर्देश के बाद अब कार्यदायी संस्था को बदल दिया गया है।
- एमके त्रिपाठी, डीएफओ

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दंडित होंगे दोषी अफसर : आरएमडी
गोरखपुर। नगर विधायक डा. राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि चिड़िया घर के निर्माण कार्य में घटिया सामग्री के प्रयोग की बात सामने आना गंभीर बात है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घटिया निर्माण के लिए दोषी अफसरों को चिह्नित कराकर उन्हें दंडित कराया जाएगा। आवश्यक हुआ तो इस मामले को विधान सभा में भी उठाउंगा।

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