हिंदू समाज का नेतृत्व करता है गोरक्षपीठ

Gorakhpur Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 43वीं पुण्यतिथि समारोह के अंतिम दिन बुधवार की शाम आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं हिंदू संगठनों के लोगों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किया।
वशिष्ट आश्रम आयोध्या से आए पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने कहा कि गोरक्षपीठ ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के समय से ही धर्म के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं सामाजिक मुद्दों पर हिंदू समाज का नेतृत्व किया है। उनके सुयोग्य उत्तराधिकारी के नेतृत्व में आज भी वह परंपरा बनी हुई है। गोरक्षपीठ को देश की जनता का समर्थन प्राप्त है और जनता इस पीठ को हिन्दू समाज का नेतृत्वकर्ता मानती है।
उन्होंने कहा कि श्रीरामजन्म भूमि के आंदोलन का नेतृत्व इसीलिए अब तक गोरक्षपीठ के ही हाथ में है और देश के सभी धर्माचार्य इस पीठ का नेतृत्व स्वीकार करते हैं। वेदांती ने कहा कि दिग्विजयनाथ की स्थापित यह परंपरा ही उन्हें युग पुरुष बना देती है।
गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत-नेपाल संबंध पर नेहरू सरकार को बार-बार दिग्विजयनाथ की सहायता लेनी पड़ी थी। दिग्विजयनाथ के धर्म, राजनीति, शिक्षा और समाज के संदर्भ में विचार आज भी प्रासंगिक है। शिक्षा और स्वास्थ्य की दृष्टि से अति पिछड़े इस पूवी उत्तर प्रदेश में उन्होंने शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाओं, तकनीकी शिक्षण संस्थाओं और आयुर्वेद कालेज की स्थापना कर हिंदुत्व आधारित सामाजिक परिवर्तन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
बड़ौदा से आए महंत गंगादास ने कहा कि दिग्विजयनाथ हमारे प्रेरणास्रोत हैं। कथाव्यास बालभरत ने कहा कि दिग्विजयनाथ केवल समाज के लिए नहीं धर्माचार्यों के लिए भी एक आदर्श हैं। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के प्राचार्यों एवं प्रधानाचार्यों ने कहा कि दिग्विजयनाथ हिन्दुत्व के ध्वजवाहक थे। वे पूर्वी उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक, सामाजिक एवं शैक्षिक पुनर्जागरण के अग्रदूत थे। सभा में अनिल, महंत सुरेश दास, महंत शांतिनाथ, महंत राम मिलन दास, महंत रवींद्र दास, बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान, महापौर डॉ सत्या पांडेय, हियुवा के प्रदेश प्रभारी राघवेन्द्र प्रताप सिंह, एवं फरेंदा के विधायक बजरंग बहादुर सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

दिग्विजयनाथ के संदेशों को आत्मसात करने की जरूरत: अवेद्यनाथ
गोरखपुर। दिग्विजयनाथ की 43वीं पुण्यतिथि पर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की सभी संस्थाओं की तरफ से बुधवार को आयोजित एक अन्य श्रद्धांजलि सभा में गोरक्षपीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ ने आह्वान किया कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की शिक्षण संस्थाएं, ऐसे भावी भारत का निर्माण करने वाली पीढ़ी तैयार करें जो दिग्विजयनाथ के सपने को साकार कर सकें। उन्होंने कहा कि दिग्विजयनाथ के संदेशों को आत्मसात करने की जरू रत है। उनका मानना था कि शिक्षा, सत्ता के हाथों में नहीं समाज के हाथों में होनी चाहिए।
पूर्व गृहराज्य मंत्री व परमार्थ आश्रम के अध्यक्ष स्वामी चिन्मयानन्द ने कहा कि दिग्विजयनाथ अवतारी पुरुष थे। वे आज भी अपनी संस्थाओं एवं अपनी यशोकृति के रूप में हमारे बीच अमर हैं। उनका आह्वान था कि रोटी, कपड़ा और मकान के लिए नहीं हम भारत के लिए जीना सीखें। उन्होंने कहा कि दिग्विजयनाथ का देश एवं समाज को योगदान अविस्मरणीय है। एक संत होने के बावजूद उन्होंने अपने मोक्ष के लिए नहीं बल्कि लोक कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। शिक्षा परिषद के सदस्य धर्मेंद्रनाथ वर्मा ने कहा कि दिग्विजयनाथ भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे और शैक्षिक क्रांति के अग्रदूत भी। इस अवसर पर दिग्विजयनाथ की स्मृति में महाराणा प्रताप महाविद्यालय जंगल धूसड़ की ओर से सप्तदिवसीय व्याख्यान माला का डॉ प्रदीप राव द्वारा संपादित वार्षिक शोध पत्रिका ‘विमर्श’ का विमोचन किया गया।

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