खाया बाटी चोखा, बिरहा गाकर काटी रात

Gorakhpur Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। सहनशीलता में धरती जैसा ही जिगर रखने वाले किसानों ने सरैया मिल प्रबंधन के साथ आगा पीछा करने वाले प्रशासनिक अफसरों को भी सबक सिखाने की ठान ली है। सोमवार को डिस्टिलरी गेट पर भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में जुटे किसानों ने मिल गेट पर ताला जड़ने के बाद रात को वहीं बाटी चोखा बनाया और गीत गवनई के साथ अपने फौलादी इरादे के बारे में इंतजामिया को संदेश भी दे दिया।
गन्ना उपजाने में तिल तिल खून जलाने वाले चौरीचौरा क्षेत्र के किसानों को वर्षों इंतजार के बाद भी जब भुगतान नहीं मिला तो उन्होंने इसे अपने तरीके से वसूलने के लिए कमर कस ली है। पहले उन्होंने मिल प्रबंधन और जिला प्रशासन से बार बार गुजारिश की। पर कभी आश्वासन देकर तो कभी झिड़कियां देकर उन्हें किनारे कर दिया गया। ये वे किसान हैं जो गन्ना मूल्य के भुगतान की उम्मीद में कर्जदार हो गए हैं। ब्याज पर ब्याज चढ़ता जा रहा है। उनके बच्चों के सपने टूट रहे हैं।
सोमवार को क्षेत्र के किसानों ने गजब का साहस दिखाया। प्रशासन को उम्मीद थी कि रात होने के साथ किसानों का प्रतिरोध ढीला पड़ जाएगा। वे स्वत: अपने घरों को लौट जाएंगे। पर जैसे जैसे रात गहराती गई उन्होंने अपने आंदोलन को उत्सव में बदल दिया। पहले भोजन का इंतजाम किया गया। चारों तरफ कंडे सुलगाने के बाद बाटी चोखा बनाकर किसानों और उनके परिवार की महिलाओं ने सहभोज किया। फिर रात काटने के लिए कहीं बिरहा तो कहीं लोकधुनों की टेर शुरू हो गई। ऐसा कर उन्होंने दुख को अपनी ताकत बना दिया। रात के सन्नाटे में उनकी टेर जितनी दूर पहुंच रही थी आसपास के गांवों के अन्य लोग भी आकर्षण में खिंचे चले आ रहे हैं। मानों जंगल में मंगल रचा दिया गया है। गेट पर जगह कम पड़ गई तो तमाम लोग पास के रेलवे स्टेशन पर सोने के लिए चले गए मगर घर जाना किसी को गंवारा नहीं था।
भाकियू नेताओं का कहना है कि सरकारी कर्ज लेने वाले किसानों को काजी हाउस की तरह बनी तहसील की जेलों में ठूंस दिया जाता है और सरचार्ज लगाकर रकम वसूल ली जाती है। मगर वर्षों से मिल प्रबंधन उनके करोंड़ो रुपये दाबकर बैठा है और जुंबिश तक नहीं हो रही है। उनका कहना है कि अगर चीनी मिल दीवालिया हो गई है तो हर दिन एक करोड़ का लाभ कमा रही डिस्टिलरी से भुगतान करे। फैसला इस बार आर पार का होगा।

किसानों की सुध लेते रहे एसडीएम चौरीचौरा
गोरखपुर। किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने की एसडीएम चौरीचौरा मोतीलाल सिंह ने अपनेतयीं कोई कसर नहीं छोड़ा। गेट पर डेरा डाले किसान रात को भी यहीं जमे रहेंगे, इस संकल्प को जानने के बाद उन्होंने शाम को पीने के पानी के टैंकरों की व्यवस्था कराई। एक टैंकर का पानी खत्म होने के पहले ही दूसरा टैंकर आकर खड़ा हो जा रहा था। इसके बाद उन्होंने सफाईकर्मियों को डिस्टिलरी गेट के सामने की जमीन साफ करने के लिए लगा दिया। खुद इस सफाई कार्य का जायजा भी लेते रहे। किसानों के साथ ही एक किनारे पर मातहतों के साथ एसडीएम भी देर रात तक जमे रहे। स्वयं प्रशासनिक महकमे से खफा किसानों ने भी उनके इस सहयोग की सराहना की।

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