पं दीनदयाल ने दिया साम्यवाद का विकल्प

Gorakhpur Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। पं दीनदयाल उपाध्याय ने ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साम्यवाद का विकल्प दिया। इसके साथ ही उन्होंने एकात्म मानववाद का दर्शन प्रतिपादित करके पूंजीवाद का विकल्प भी तलाशा। व्यक्ति निर्माण ही राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का माध्यम है।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के एनसी हास्टल में दीनदयाल जयंती की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा ने कहा कि एकात्ममानववाद के दर्शन में चिंतन का केंद्र पूंजी नहीं अपितु मानव है। यही राष्ट्रीय पुनर्निर्माण का आधार है। समाज, देश हित में समर्पण की भावना ही एकात्म मानववाद के दर्शन का सार है। विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. चंद्रशेखर ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद समाज एवं राष्ट्र के लिए प्रकाश स्तंभ है। दर्शन के आधार पर राष्ट्र की आर्थिक-सामाजिक पुर्नरचना की आवश्यकता है। एनसी हास्टल के अभिरक्षक प्रो. केएन सिंह ने कहा कि एकात्म मानववाद का दर्शन सर्वे भवंतु सुखिन: की भावना पर आधारित है। छात्रावासियों की तरफ से पं दीनदयाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि की गई।

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