ओजोन परत का क्षरण घातक

Gorakhpur Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। ओजोन परत का क्षरण खतरनाक बनता जा रहा है। इसमें सुधार के लिए गंभीर प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया गया। दैनिक उपयोग में फ्रीज, एसी, स्प्रे आदि मानव जीवन के लिए खतरनाक बनते जा रहे हैं। वायुमंडल में क्लोरोफ्लोरो कार्बन की मात्रा बहुत बढ़ गई है। इसकी वजह से वायुमंडल के तापमान में भी बढ़ोतरी हुई है। विश्वव्यापी गर्मी बढ़ाने में क्लोरोफ्लोरो कार्बन का 14 प्रतिशत योगदान है।
ये बातें रविवार को अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस पर आयोजित गोष्ठी में कही गईं। जेएस पब्लिक स्कूल करीमनगर में ‘ओजोन संरक्षण एवं पर्यावरण’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि पूर्वांचल इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के प्रवक्ता डॉ. वहीदुर्रहमान ने कहा कि ओजोन परत मनुष्यों और पौधों को क्षतिग्रस्त होने से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बहुत जरूरी है। लेकिन ओजोन परत में लगातार क्षरण हो रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता चंद्रेश कुमार ने कहा कि ओजोन एक तीव्र गंध वाली क्रियाशील विषैली वायुमंडलीय गैस है। ओजोन की समस्या एक विश्वव्यापी समस्या है। इस मौके पर महिला कल्याण प्रशिक्षण संस्थान के सचिव गिरिजेश कुमार गुप्ता ने कहा कि अब तक ओजोन परत का पांच प्रतिशत भाग नष्ट हो चुका है। ओजोन क्षरण के कारण ही त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद, फसलों की उत्पादकता में कमी, आनुवांशिक परिवर्तन, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी का खतरा है। इस मौके पर सेंट एंथोनी शिक्षण संस्थान के सचिव डीजी सिंह, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फरेश कुमार, पीपी सिंह, राममिलन वर्मा, केके सिंह, गोरख प्रसाद, डॉ. रजनीश कुमार सिंह समेत अन्य उपस्थित थे।

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