कालेजों में शोध कराने योग्य शिक्षकों की कमी

Gorakhpur Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। गोरखपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध कालेजों में शोध की स्थिति ठीक नहीं है। कालेजों में पंजीकृत छात्र तो हैं लेकिन वहां शोध कराने योग्य शिक्षक नहीं हैं। यूनिवर्सिटी की इस लापरवाही से परेशान छात्र-छात्राएं कालेज से लेकर यूनिवर्सिटी तक का चक्कर लगा रहे हैं। कालेजों के भूगोल से शोध करने वाले छात्र-छात्राओं ने कुलपति से मिलकर समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा। फीस जमा करने के बाद भी कार्रवाई न होने पर छात्रों ने एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद 17 सितंबर से यूनिवर्सिटी में क्रमिक अनशन की चेतावनी भी दी है।
यूनिवर्सिटी से संबद्ध कुशीनगर, खलीलाबाद, सिद्धार्थनगर, देवरिया स्थित महाविद्यालय के 19 शोध छात्र-छात्राएं सोमवार को यूनिवर्सिटी पहुंच गए । वीसी से मिलने के लिए उन्हें दफ्तर के बाहर तीन घंटे इंतजार करना पड़ा। करीब साढ़े तीन बजे वार्ता हुई तो अपनी समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा। छात्र-छात्राओं ने बताया कि जुलाई 2011 को शोध पंजीकरण के लिए साक्षात्कार हुआ। यूनिवर्सिटी की तरफ से शिक्षकों को शोध कराने की जिम्मेदारी दी गई। प्री-पीएचडी पाठ्यक्रम में फीस जमा कर नियमित कक्षाएं भी की गई लेकिन एक साल बाद जो जवाब यूनिवर्सिटी मिल रहा है, उससे वह परेशान हैं।
छात्र-छात्राओं का कहना था कि शोध पंजीकरण को लेकर डीन आर्ट से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि शिक्षक पीएचडी कराने के लिए योग्य नहीं हैं। एक साल से अधिक का समय बीत गया, इसके पूर्व यूनिवर्सिटी ने इस तरह की समस्या नहीं बताई। गोरखपुर पहुंचे छात्र-छात्राओं में विभा सिंह, पूनम तिवारी, आलोक कुमार कुशवाहा, आदित्य कुमार, दिव्या पाल, नंदा पांडेय, श्रद्धा श्रीवास्तव, जितेंद्र आदि ने यूनिवर्सिटी को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। कार्रवाई न होने पर 17 सितंबर से क्रमिक अनशन की चेतावनी दी है।

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