जमीन पर लिटाकर किया इलाज

Gorakhpur Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज में जूनियर डाक्टरों की गुंडई और मरीजों से दुर्व्यवहार के बाद जिला अस्पताल में अचानक मरीजों की भीड़ बढ़ गई। दो दिनों से फुल चल रहे जिला अस्पताल में डाक्टरों और कर्मचारियों ने हर आने वाले मरीज का इलाज किया। इमरजेंसी में लगे तीन बेड लगातार भरे रह रहे। बाद में आए मरीजों का बाहर बरामदे में इलाज किया जा रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में लगातार दूसरे दिन 2500 से ज्यादा मरीज आए। इमरजेंसी में बृहस्पतिवार को 80 से ज्यादा मरीज आए। बुधवार को भी यही स्थिति रही। सीरियस मरीजों को अस्पताल प्रशासन ने भर्ती किया। डाक्टरों ने ठीक हो चुके मरीजों को डिस्चार्ज कर बेड खाली किया। छोटे काजीपुर निवासी अधीश देव सिंह को सिर में चोट लगी थी। घर में ही अधीश किसी चीज से टकरा गए थे। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो यहां काफी भीड़ थी। इमरजेंसी भरी हुई थी। अधीश के पिता ने बताया कि अंदर जाकर जब उन्होंने डाक्टर को जानकारी दी तो उन्होंने तत्काल एक इंटर्न को भेजा। उसने बरामदे में पट्टी की और सूई लगाई। इतनी सुविधा मिलना बहुत है। भीड़ के बाद भी जिला अस्पताल में अच्छा काम हो रहा है।

मेडिकल कालेज से वापस किया गया
चौरीचौरा के फुटहिया इमिलियहवा निवासी राजेश की बेटी अंकिता (डेढ़ साल) को दो दिन से बुखार था। बुधवार की रात उसे अचानक झटका आना शुरू हो गया। राजेश ने लोकल डाक्टर को दिखाया तो उसने मेडिकल कालेज ले जाने की सलाह दी। बृहस्पतिवार की सुबह छह बजे राजेश मेडिकल कालेज पहुंचा। यहां इमरजेंसी में पहुंचने पर डाक्टरों ने अंकिता को भर्ती करने से मना कर दिया। वहां से राजेश जिला अस्पताल वापस आया। राजेश ने कहा कि वह जिला अस्पताल आकर संतुष्ट है।

सभी को मिल रहा इलाज
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डा. एके पांडेय ने कहा कि ओपीडी और इमरजेंसी में आए सभी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। जो ज्यादा गंभीर हैं उन्हें भर्ती किया जा रहा है। इमरजेंसी में दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था है।
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जिला अस्पताल में इंसेफेलाइटिस के 11 मरीज
जिला अस्पताल के इंसेफेलाइटिस आईसीयू और इंसेफेलाइटिस वार्ड में 11 मरीजों का इलाज चल रहा है। प्रमुख अधीक्षक डा. एके पांडेय ने बताया कि इस साल अब तक 49 जेई व एईएस पीड़ित मरीज जिला अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। इनमें से 28 ठीक होकर जा चुके हैं। 10 की मौत हो चुकी है।

मरीज के परिजन को पकड़ा दिया आक्सीजन पाइप
गोरखपुर। जिला अस्पताल में एक ओर डाक्टर मरीजों को इलाज देने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं वहीं कुछ लोग लापरवाही भी कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को इंसेफेलाइटिस वार्ड में एक नर्स ने भर्ती बच्चे के परिजनों को आक्सीजन पाइप पकड़ा दिया। नर्स ने कहा कि आक्सीजन पाइप बच्चे की नाक के सामने लगाए रहो। इससे उसे सांस लेने में आसानी होगी। बाद में परिजनों के कहने पर नर्स ने बच्चे को आक्सीजन मास्क पहनाया।
गोपलापुर निवासी सुनील के बेटे दिव्यांश (दस माह) को रात में बुखार के बाद झटका आया। परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। यहां दिव्यांश को इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती किया गया। दोपहर में दिव्यांश को सांस लेने में दिक्कत हुई तो नर्स ने आक्सीजन सिलेंडर मंगवाकर उससे निकला पाइप परिजनों को थमा दिया। नर्स ने कहा कि बच्चे की नाक के आगे यह पाइप लेकर खड़े रहो। जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डा. एके पांडेय ने कहा कि यह गलत है। बच्चे को आक्सीजन मास्क लगाना चाहिए था। वह डाक्टरों से बात करेंगे।

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