साहित्य को उद्देश्यपरक मानते थे प्रेमचंद

Gorakhpur Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। मुंशी प्रेमचंद साहित्य को उद्देश्यपरक मानते थे। अपनी रचनाओं द्वारा उन्होंने सामाजिक आर्थिक विसंगतियों को उजागर किया। किसानों की दयनीय स्थिति, स्त्री विवशता और दमनचक्र में पिसते किसानों के चित्र उनकी अधिकांश कृत्रियों में देखने को मिलते हैं। उनका साहित्य तत्कालीन समाज का यथार्थ आइना है, जिसमें वर्तमान समाज का प्रतिबिंब देखा जा सकता है।
चंद्रकांति रमावती देवी आर्य महिला पीजी कालेज में आयोजित दो दिवसीय प्रेमचंद जयंती समारोह के उद्घाटन अवसर पर ये बातें प्रो. अनंत मिश्र ने कहीं। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का विचार आज भी प्रासंगिक है। प्रेमंचद वर्तमान अंतरात्मा विहीन सामाजिक व्यवस्था के सर्वोत्तम विकल्प हैं। प्रो. मिश्र ने उनकी कई रचनाओं की विस्तृत चर्चा की।
कालेज के प्रबंधक डॉ. रामरक्षा पांडेय ने कहा कि प्रेमचंद के विचारों को आत्मसात करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। बीएड छात्र सोनम, अल्का पांडेय ने भी प्रेमचंद के व्यक्तित्व, कृतित्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ उनके चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इसके बाद उनकी कहानी मंत्र पर आधारित नाटक का मंचन छात्राओं द्वारा किया गया। प्राचार्या डॉ. रंजना ने अतिथियों का स्वागत किया।

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