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आखिरी 15 मिनट संभाल लें तो जीत पक्की

Gorakhpur Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
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गोरखपुर। जिस हॉकी ने दशकों तक भारत को खेल जगत में बुलंदियों पर रखा। आठ ओलंपिक गोल्ड मेडल दिलाए। उसी हॉकी के बुरे दिन शुरू हुए तो हमारी रैंकिंग विश्व में दसवें नंबर पर जाकर टिकी। बीजिंग ओलंपिक क्वालीफाई न करने की जो दुर्गति हॉकी ने झेली है वह किसी से छुपा नहीं है। इस गर्दिश से उबरने में आठ साल लग गए। भारतीय हॉकी टीम को अपना खोया गौरव हासिल करने का एक बार फिर सुनहरा मौका मिला है। बशर्ते वह अंतिम के 15 मिनट भी शुरू जैसा ही खेले। 1964 के टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम में आउट साइड लेफ्ट खिलाड़ी रहे 72 वर्षीय अली सईद इसी तरह देख रहे हैं भारतीय टीम को। योगेश्वर सिंह से उनकी बातचीत के अंश -
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0 सोमवार को नीदरलैंड से होने वाले मुकाबले को आप किस तरह देख रहे हैं। क्या भारतीय हॉकी टीम मैच आसानी से जीत जाएगी?
0 भारतीय हॉकी टीम अच्छा खेल रही है। पर विश्व रैंकिंग में नंबर तीन पर कायम नीदरलैंड की टीम बहुत मजबूत है। भारतीय टीम अगर नीदरलैंड से ड्रा भी खेल लेती है तो हमें अपनी जीत समझनी चाहिए। नीदरलैंड की ताकत उनके पेनाल्टी कार्नर स्पेशलिस्ट पाल हैं। जिन्हें रोक लिया तो हमारी जीत आसान हो जाएगी।
0 भारतीय टीम की फिटनेस अन्य टीमों से कैसी है। भारतीय टीम को मैच जीतने के लिए क्या करना चाहिए
0 नोब्स के कोच बनने के बाद टीम की फिटनेस में बहुत सुधार आया है। पहले हम 50 से 55 मिनट बहुत अच्छा खेलते थे। लीड लेने के बावजूद अंतिम के 15 मिनट में मैच हार जाते थे। इसका सबसे बड़ा कारण फिटनेस थी। नोब्स ने फिटनेस पर बहुत काम किया है। लंदन ओलंपिक नीले एस्ट्रोटर्फ और पीली गेंद से होगा। इस नए बदलाव का क्या असर होगा खेल के दौरान ही पता चलेगा।
0 भारतीय हॉकी के पिछड़ने का कारण क्या है। सुधार के लिए क्या करना चाहिए?
0 भारत में हॉकी की नर्सरी खत्म सी हो गई है। स्कूल, विश्वविद्यालय में हॉकी प्रतियोगिताएं न के बराबर हो रही हैं। अगर नीदरलैंड से तुलना की जाए तो वहां हर क्लब में एस्ट्रोटर्फ है। बच्चे शुरू से ही एस्ट्रोटर्फ पर हॉकी सीखते है। जबकि हम शुरू के 14-15 साल प्राकृतिक घास के मैदान पर खेलते हैं और मुकाबला एस्ट्रोटर्फ (सिंथेटिक घास) के मैदान पर होता है। स्कूल और कालेज से हाकी के उत्थान की शुरुआत करनी चाहिए। जब तक हमारी नर्सरी नहीं सुधरेंगी तब तक हाकी अपनी खोई पहचान वापस नहीं पा सकती है।
0 यूपी के हॉकी खिलाड़ियों की संख्या क्यों कम होती जा रही है। इसके पीछे क्या कारण है?
0 ऐसा नहीं है कि यूपी में हॉकी प्रतिभाएं नहीं है। दिवाकर राम, इति श्रीवास्तव, वर्तिका सिंह जैसी प्रतिभाएं है। जिन्होंने समय समय पर अपने आप को साबित भी किया है। लेकिन जो सपोर्ट उन्हें मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है। 60 के दशक में झमन लाल शर्मा, 64 में अली सईद, जफर इकबाल, विवेक सिंह, राजेंद्र पाल, आरपी सिंह, सैय्यद अली जैसे उत्तर प्रदेश के खिलाड़ियों ने भारतीय हाकी को बुलंदियों पर पहुंचाया। उत्तर प्रदेश प्रतिभाओं की खान है।
0 आपके समय और अब की हॉकी में क्या परिवर्तन आया है।
जवाब : अब हॉकी की पूरी साइंस ही बदल गई है। इस खेल के रूल अब फुटबाल की तरह हो गए हैं। पहले की हॉकी कलात्मक थी अब इसमें ‘मसल पावर’ और ‘स्पीड ’ की प्रमुखता हो गई है। हम ‘स्पीड’ में मात खा जा रहे हैं।
0 लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम कैसा प्रदर्शन करेगी ?
0 टीम में सरदार सिंह और संदीप सिंह के साथ साथ डिफेंस लाइन पर दारोमदार है। ये फार्म में हैं। फिटनेस ठीक है। प्रदर्शन संतोषजनक होना चाहिए।
सवाल : टोक्यो में गोल्ड मेडल जीतने के बाद आपको कैसा लगा था।
जवाब : टोक्यो में जब हम गोल्ड मेडल जीते और आसमान में तिरंगा लहराया, मानो ऐसा लगा हमने पूरा विश्व जीत लिया है। उस पल को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है।

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