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जंगली जानवर के हमले से दस लोग घायल

Gorakhpur Updated Mon, 30 Jul 2012 12:00 PM IST
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गोरखपुर। खजनी के सरया तिवारी और कोठा गांव के लोग एक जंगली जानवर से दहशत में हैं। यह जानवर अब तक दस लोगों को अपने खूनी पंजे से घायल कर चुका है। वहीं आधा दर्जन बकरियां उठा ले जा चुका है। कोई इसे तेंदुआ कह रहा है तो कोई जंगली सुअर। वन विभाग पद चिन्हों के आधार पर भेड़िया बता रहा है। जानवर से बचने के लिए गांव वाले पहरा दे रहे हैं। खेत खलिहान लोग समूह बनाकर ही निकल रहे हैं।
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खजनी प्रतिनिधि के मुताबिक जानवर की दहशत 20 जुलाई की रात से शुरू हुई। पहला शिकार थीं पचपन साल की असरफा देवी। रात में घर के बारह चारपाई पर सोई थी कि आधी रात को जानवर ने इनके चेहरे पर पंजा मार दिया। शोर मचाने के बाद जब लोग दौड़े तो वह भाग गया। उसके बाद तो उसे इंसानी खून की भूख लग गई। उसी रात उसने गांव के संतोष के नौ साल के बेटे अजय पर भी हमला बोल दिया। ग्रामीणों ने अजय को उसके चंगुल से बचा लिया। सुबह तक यह खबर जंगल में आग की तरह पूरे इलाके में फैल गई। ग्रामीणों ने वन विभाग को खबर किया। 22 जुलाई को रेंजर आरएन निगम और फारेस्ट गार्ड भानू प्रताप शुक्ल के नेतृत्व में वन विभाग की एक टीम गांव में पहुंची और जानवर के पद चिन्हों के आधार पर भेड़िया के रूप में उसकी पहचान की। टीम ने जानवर को पकड़ने का वायदा किया और चली आई। तीन दिन बाद यानी 23 जुलाई की रात में जानवर फिर शिकार की तलाश में गांव आया और इस बार उसका शिकार गांव के मोहन बने। यही नहीं उसका दायरा भी बढ़ गया सरया तिवारी गांव से सटे कोठा गांव के अवधेश शुक्ला की मां अमीरा देवी (70) इसी गांव के अनिल तिवारी के नौ साल के बेटा को भी उसने घायल कर दिया। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में दहशत फैल गई। गांव के लोग जानवर से बचने के लिए रतजगा करने लगे। दिन में खेत खलिहान जाते वक्त लोग अकेले जाने के बजाए समूह में और लाठी डंडे से लैस होकर निकलने लगे। कोठा और सरया गांव के सोनरा, विनोद, राम भवन, गेना की बकरियां उठा ले गया। लेकिन इंसानों पर उसका हमला खत्म नहीं हुआ। 28 जुलाई की रात में उसका शिकार पैंसठ साल की डासी देवी रहीं। जानवर के पंजे से वह घायल हो गईं। गुस्साए गांव वाले लाठी-डंडा लेकर रात से ही जानवर की तलाश में जुट गए इसी बीच रविवार की सुबह करीब दस बजे वह दिखाई दिया। ग्रामीणों ने उसका पीछा किया तो वह केले के खेत में जाकर छिप गया। गांव के लोगों ने खेत को घेर कर तलाशी शुरू की लेकिन वह वहां से भाग निकला। ग्रामीणों के मुताबिक भूरे रंग का जानवर था उसकी पूंछ लंबी थी और साइज में कुत्ते से बड़ा दिख रहा था। ग्रामीण उसे तेंदुआ बता रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुआ है, पर ऐसी कोई बात नहीं है। वह तेंदुआ नहीं है भेड़िया है। फिलहाल संसाधनों का अभाव है। उसे पकड़ने के लिए एक पिजड़ा तैयार करना पड़ेगा। उच्च अधिकारियों से अवगत करा दिया है। जल्द ही उसे पकड़ने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। तब तक ग्रामीणों को सावधान रहना होगा।
आरएन निगम, रेंजर

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